राहुल गांधी के आरोपों से छिड़ी बहस पर अब प्रशांत किशोर ने मांगा जवाब, बोले- क्या चुनाव आयोग अब भी चुप रहेगा?

राहुल गांधी के महाराष्ट्र चुनाव पर सवाल उठाने के बाद अब इस पर प्रशांत किशोर ने कहा कि कांग्रेस विपक्ष की मुख्य पार्टी है और चुनाव आयोग को उनके आरोपों पर सब कुछ स्पष्ट करना देना चाहिए।
क्या चुनाव आयोग अब भी चुप रहेगा? राहुल के आरोपों पर PK ने उठाए गंभीर सवाल
जनसुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर (फोटो- सोशल मीडिया)
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पटना: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर उठाए गए सवालों के बाद देशभर में सियासी हलचल तेज हो गई है। बिहार में इस बयान की गूंज उस वक्त और तेज हो गई जब जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब देश का प्रमुख विपक्षी नेता चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, तो इसका जवाब देना आयोग की जिम्मेदारी बनती है। प्रशांत किशोर ने यह बयान बिहार बदलाव यात्रा के दौरान पत्रकारों से बातचीत में दिया, जिससे इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है।

बिहार के खगड़िया और बेगूसराय जिले के दौरे पर निकले प्रशांत किशोर ने इस बयान से पहले स्थानीय सिद्धपीठ बड़ी दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना की और बिहार के उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे चाहते हैं कि बिहार में बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, युवाओं को रोजगार मिले और राज्य गरीबी, अशिक्षा और भ्रष्टाचार से मुक्त होकर देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो। उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए जन जागरूकता बेहद जरूरी है।

प्रशांत किशोर ने क्या कहा

प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को लेकर कहा कि जब विपक्ष के नेता सार्वजनिक रूप से चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं, तो उस पर चुप्पी नहीं होनी चाहिए। आयोग को चाहिए कि वह जनता को स्पष्टीकरण दे और यह सुनिश्चित करे कि चुनावों की निष्पक्षता पर कोई संदेह न रहे। उन्होंने साफ कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह चुनावों की पारदर्शिता पर उठे हर सवाल का जवाब दे।

बिहार बदलाव यात्रा और बिहार पर फोकस

प्रशांत किशोर इन दिनों बिहार बदलाव यात्रा पर हैं, जिसके तहत वे राज्य के अलग-अलग जिलों में दौरा कर रहे हैं। उन्होंने बेगूसराय में पूजा के बाद कहा कि उनकी कामना है कि बिहार के बच्चे शिक्षा से जुड़ें और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की तस्वीर बदलने के लिए नीतियों से ज्यादा जनभागीदारी की जरूरत है। यही सोच लेकर वे अपनी यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं।

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