अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के बीच टेस्ला का कड़ा कदम, चीनी पार्ट्स को लेकर सप्लायरों को दिया सख्त निर्देश

No China Parts: टेस्ला ने अमेरिका में बनने वाली कारों के लिए चीनी सामानों पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्णय लिया है। इस बीच चीन में टेस्ला की बिक्री 9.9 प्रतिशत गिरी है।
Test instructed not to use Chinese parts
टेस्ला कार और एलन मस्क।
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US an China Trade War: अमेरिका-चीन ट्रेड टेंशन के बीच टेस्ला ने अब ग्लोबल सप्लाई चेन में ऐतिहासिक बदलाव शुरू कर दिया है। कंपनी अपने सप्लायरों को चीन में बने किसी भी कंपोनेट का इस्तेमाल नहीं करने के निर्देश दे रही।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह कदम टैरिफ के उतार-चढ़ाव और व्यापार संबंधी अनिश्चितता से बचने के लिए उठाया गया है।

पूरी तरह चीन के बने पार्ट्स का हटाने का लक्ष्य

वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक टेस्ला और उसके सप्लायरों पहले ही कुछ चीनी कंपोनेंट्स को बदल चुके हैं। एक-दो साल के अंदर पूरी तरह चीन के बने पार्ट्स का हटाने का लक्ष्य है। कंपनी ने इस रिपोर्ट पर अधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। बता दें, अमेरिका-चीन व्यापार विवाद टेस्ला की लागत और प्राइसिंग स्ट्रैटेजी को प्रभावित कर रहा। राष्ट्रपति ट्रंप के लगाए और हटाए जाने वाले टैरिफ के कारण ऑटोमेकर की सप्लाई चेन मैनेजमेंट एवं भविष्य की रणनीति जटिल हो गई है। इस कारण टेस्ला दो साल से उत्तरी अमेरिका से अधिक सोर्सिंग बढ़ा रहा।

चीन में टेस्ला की बिक्री 9.9 प्रतिशत घटी

चाइना पैसेंजर कार एसोसिएशन के अनुसार अक्तूबर में टेस्ला की चीन में बनी इलेक्ट्रिक की बिक्री 9.9 प्रतिशत घटी है। यह 61497 यूनिट रह गई है। जो सितंबर की 2.8 प्रतिशत बढ़ोतरी के बाद आई बड़ी गिरावट है। शंघाई प्लांट में मॉडल 3 और मॉडल वाई का उत्पादन महीने-दर- महीने 32.3 प्रतिशत घटा है।

यह साल ऑटो इंडस्ट्री के लिए इमरजेंसी मोड का साल

दो देशों में तनाव, चिप शॉर्टेज, दुर्लभ धातुओं की कमी और सप्लाई रुकावटों ने पूरे ऑटो सेक्टर को इस पूरे साल अलर्ट मोड पर रखा है। इन परिस्थितियों में कई कंपनियां चीन पर निर्भरता कम करने को अपनी तैयारी और रणनीति तेज कर दी है।

एशिया, अमेरिका एवं यूरोप में नए सप्लाई बेस ढूंढ रहीं कंपनियां

इस सप्ताह जनरल मोटर्स ने भी हजारों सप्लायरों को निर्देश दिया है कि वे सप्लाई चेन से चीन में बने कंपोनेंट्स हटाना शुरू करें। यह स्पष्ट संकेत है कि ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री भविष्य में बड़े सप्लाई चेन शिफ्ट की ओर बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक दबाव, टैरिफ और सप्लाई रिस्क की वजह से कई कंपनियां एशिया, अमेरिका एवं यूरोप में नए सप्लाई बेस ढूंढ रही है। टेस्ला का कदम इस व्यापक बदलाव की अगुवाई कर सकता है।

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