नवभारत निशानेबाज: कहां चली गई मस्क की मुस्कान सबसे धनवान, फिर भी परेशान

Musk Trump Ties: एलन मस्क दुनिया के सबसे अमीर हैं, फिर भी संतुष्ट नहीं। ट्रंप की जीत, टेस्ला की ताकत और भारत में फैक्ट्री के सपने के बीच सत्ता और दौलत का अद्भुत रिश्ता सामने आता है।
Navbharat Shooter: Where did Musk's smile go? The richest man, yet troubled.
नवभारत डिजाइन फोटो
Updated on

Elon Musk Wealth Power:  पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, एलन मस्क इस बात से खुश और संतुष्ट नहीं हैं कि वह विश्व के सबसे धनी व्यक्ति हैं। उनके पास इतनी दौलत है कि वह मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने का सपना साकार कर सकते हैं। टेस्ला कार के निर्माता मस्क अपने रकिट से किसी को भी अंतरिक्ष की सैर करवा सकते हैं। ट्रंप को दूसरी टर्म में राष्ट्रपति निर्वाचित करने के लिए मस्क ने बेशुमार दौलत खर्च की थी। हर नेता की सफलता के पीछे किसी धनवान मित्र का हाथ होता है। किसी के साथ मस्क है तो किसी के साथ अदाणी-अंबानी!'

हमने कहा, 'कुछ लोगों को यह बात काफी अजीब लगेगी कि 668 अरब डालर की नेटवर्थ रहने के बाद भी ट्रंप खुद की खुशहाल महसूस नहीं करते। गत वर्ष टेस्ला के शेयर होल्डर्स ने अपने चीफ एग्जीक्यूटिव एलन मस्क के लिए 1 खरब या वन ट्रिलियन डॉलर का कामकाज पर आधारित कम्पेनसेशन पैकेज मंजूर किया। समझ लीजिए कि क्यों हो। मस्क का मुकद्दर कितना जबरदस्त है, ऊपरवाले ने हाथी के पैर से उनकी किस्मत लिखी है। मस्क की विभिन्न शादियों और प्रेमिकाओं से एक दर्जन से भी ज्यादा औलादें हैं जिनके नाम याद रख पाना भी मुश्किल है। जब अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी मस्क से मिलने पहुंचे तो वह बैठक में अपने बच्चों के साथ खेलते और बातें करते नजर आए। मस्क का ध्यान मोदी से मीटिंग की बजाय अपनी संतानों की ओर था। मोदी चाहते थे कि मस्क भारत में अपनी ई-कार टेस्ला की फैक्ट्री खोलें।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज मुख्य बात यह है कि सुपर रिच होने पर भी मस्क खुश क्यों नहीं हैं? उन्हें कभी किसी चीज का अभाव नहीं रहा। उनकी बड़ी से बड़ी इच्छा या महत्वाकांक्षा पूरी हुई और अब भी हो रही है। अर्थ और काम तो उन्होंने अर्जित कर लिए, सिर्फ धर्म और मोक्ष बाकी रह गया।'

हमने कहा, 'लालसा कभी तृप्त नहीं होती। धनी व्यक्ति की जिंदगी और अधिक धन संग्रह या व्यवसाय बढ़ाने में बीत जाती है। धर्म की वृद्धि करनी चाहिए, धन की नहीं। धन को दान आदि सत्कर्मों में व्यय करना चाहिए, धर्म बढ़ेगा तो धन अपने आप आने लगेगा। किसी व्यक्ति के भोजन, बख, सुखोपभोग के बाद जो शेष संपत्ति बचती है, उसकी वह केवल रखवाली करता है। चोरों के भय से मकान की ऊंची चारदीवारी बनानी पड़ती है। एक व्यक्ति धन जमा करता है और उसके वंशज उसे उड़ा डालते हैं। शायद इन बातों को समझकर एलन मस्क अनहैपी हो उठे हैं।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

Navbharat Live
navbharatlive.com