
राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प (सोर्स-सोशल मीडिया)
US Reduces Tariffs On Food Imports: अमेरिका में लगातार बढ़ रही महंगाई ने उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ डालना शुरू कर दिया था, जिसे लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर काफी दबाव था। हाल ही में हुए स्थानीय चुनावों में भी मंहगाई एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरी और ट्रंप को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।
इसी दबाव और बढ़ती शिकायतों के बीच ट्रंप प्रशासन ने अब खाद्य आयात पर लगने वाले टैरिफ यानी शुल्क को कम करने का एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इस कदम से न केवल अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी बल्कि भारत जैसे देशों के लिए अपने कृषि उत्पादों के निर्यात के नए रास्ते भी खुलेंगे।
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह बड़ा फैसला अमेरिका में बढ़ती महंगाई और उपभोक्ताओं की शिकायतों को देखते हुए लिया है। दरअसल ट्रंप द्वारा पहले लगाए गए टैरिफ का सीधा असर बाजार में चीजों की कीमतों पर पड़ रहा था, जिससे उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही थी।
हाल ही में न्यूयॉर्क में हुए मेयर और गवर्नर के चुनावों में महंगाई एक महत्वपूर्ण मुद्दा रही, जिसमें ट्रंप की पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद ट्रंप ने कई कृषि उत्पादों पर लगे टैरिफ को हटाने का निर्णय लिया। व्हाइट हाउस ने घोषणा की कि फल, जूस, चाय और मसाले उन आयातों में शामिल हैं जिन पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा। जिन अन्य वस्तुओं पर टैरिफ घटाया गया है उनमें कॉफी, कोको, संतरे, टमाटर और बीफ शामिल हैं।
यह फैसला भारत के लिए एक बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। जिन खाद्य आयातों पर टैरिफ घटाया गया है उनमें भारत के खास उत्पाद जैसे आम, अनार और चाय शामिल हैं। पहले ट्रंप ने भारत से आयात पर 25 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क लगाया था जिससे इन उत्पादों का अमेरिका में निर्यात महंगा हो गया था।
टैरिफ हटने से अब भारत के आम अनार और चाय के निर्यात में बड़ी वृद्धि देखने को मिल सकती है। इससे पहले भी बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ट्रंप ने जेनेरिक दवाओं को शुल्क से मुक्त किया था जिसका सीधा फायदा भारत को हुआ था क्योंकि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली लगभग 47 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं भारत ही सप्लाई करता है। अब खाद्य आयात पर शुल्क हटने से भारत के किसानों और निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा और उनके उत्पादों की मांग बढ़ेगी।
अमेरिका में महंगाई एक बड़ा राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा बनी हुई है। सितंबर के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के अनुसार भुनी हुई कॉफी की कीमतों में 18.9 प्रतिशत और बीफ की कीमतों में 14.7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई थी। भारतीय किराना दुकानों में भारत से आयातित मसालों और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तो लगभग 30 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई थी जिसका मुख्य कारण टैरिफ ही था।
एक हालिया सर्वेक्षण में 63 प्रतिशत पंजीकृत मतदाताओं ने माना कि जीवन-यापन की लागत और अर्थव्यवस्था के मामले में ट्रंप उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। ट्रंप भले ही महंगाई के मुद्दे को पिछली जो बाइडेन सरकार पर डालने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन खाद्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि उनके कार्यकाल में लगे टैरिफ के कारण हुई थी। इस नए फैसले से उम्मीद है कि वह उपभोक्ताओं की नाराजगी को कुछ हद तक कम कर पाएंगे।
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भारत से आमों का आयात भारत-अमेरिका संबंधों में हमेशा से एक विशेष स्थान रखता आया है। पहले राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने टैरिफ हटाकर इस रिश्ते को और मजबूत किया था। टैरिफ घटने के बाद आम और अनार के निर्यात में भारी बढ़ोतरी की संभावना है। फरवरी में जब ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई थी तब जारी किए गए संयुक्त बयान में भी मिसाइलों और परमाणु सहयोग के साथ-साथ भारतीय आमों और अनारों का निर्यात बढ़ाने के लिए अमेरिका द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की गई थी। यह नया फैसला न केवल व्यापार के लिए बल्कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों के लिए भी एक सकारात्मक कदम है।






