Automatic vs Manual: कार खरीदने से पहले जानें कौन-सा ट्रांसमिशन है आपके लिए सही

Car Transmission: इसके साथ ही बदल रहे हैं कारों में इस्तेमाल होने वाले ट्रांसमिशन सिस्टम। आज मार्केट में मैनुअल ट्रांसमिशन (MT) से लेकर ड्यूल क्लच ट्रांसमिशन (DCT), CVT, AMT, IMT और टॉर्क कन्वर्टर है।
Automatic vs Manual: कार खरीदने से पहले जानें कौन-सा ट्रांसमिशन है आपके लिए सही
Automatic vs Manual में क्या है अतंर। (सौ. AI)
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Automatic Vs Manual: भारत का ऑटोमोबाइल बाजार लगातार विकसित हो रहा है और इसके साथ ही बदल रहे हैं कारों में इस्तेमाल होने वाले ट्रांसमिशन सिस्टम। आज मार्केट में मैनुअल ट्रांसमिशन (MT) से लेकर ड्यूल क्लच ट्रांसमिशन (DCT), CVT, AMT, IMT और टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमेटिक (AT) तक कई विकल्प मौजूद हैं। हर ट्रांसमिशन की अपनी कार्यप्रणाली, फायदे और कमियाँ हैं। इनकी विस्तृत जानकारी नीचे पढ़ें।

1. मैनुअल ट्रांसमिशन (MT): सबसे पुराना, सबसे भरोसेमंद

मैनुअल ट्रांसमिशन का आविष्कार 1980 में एक फ्रेंच इन्वेंटर ने किया था।

• इसमें गियर बॉक्स, क्लच पैडल और विभिन्न साइज़ के गियर शामिल होते हैं।

• गियर बदलने के लिए क्लच पैडल दबाकर गियर लीवर से शिफ्टिंग करनी होती है।

• इसमें आरपीएम मैच न होने पर 'जर्क' महसूस हो सकता है।

फायदे: पूरी कंट्रोलिंग ड्राइवर के पास, कम कॉस्ट, कम मेंटेनेंस और बेहतरीन रिलायबिलिटी।

नुकसान: ट्रैफिक में बार-बार गियर बदलना परेशान करता है, नए ड्राइवरों के लिए कठिन।

2. ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन (AT): टॉर्क कन्वर्टर वाली स्मूथ ड्राइव

यह सबसे पहला सच्चा ऑटोमेटिक सिस्टम माना जाता है।

• इसमें क्लच की जगह टॉर्क कन्वर्टर होता है, जिसमें पंप और टर्बाइन पावर ट्रांसफर करते हैं।

• स्पीड के हिसाब से गियर बदलने के लिए प्लैनेटरी गियर सिस्टम और मेट्रॉनिक सिस्टम होता है।

फायदे: क्लच पैडल की जरूरत नहीं, स्मूथ परफॉर्मेंस।

नुकसान: फ्यूल एफिशिएंसी कम, ज्यादा मेंटेनेंस और थोड़ा लैग।

3. कंटीन्यूअस वेरिएबल ट्रांसमिशन (CVT): बिना गियर वाली स्मूथ राइड

1958 में लॉन्च हुआ यह सिस्टम पुली और बेल्ट पर आधारित है।

• पुली का डायमीटर बदलकर गियर रेशियो एडजस्ट होता है।

फायदे: स्मूथ ड्राइविंग, बेहतर माइलेज।

नुकसान: एक्सीलरेशन में 'रबर-बैंड इफेक्ट', कम रिलायबिलिटी, हाई मेंटेनेंस।

4. ड्यूल क्लच ट्रांसमिशन (DCT): सबसे स्पोर्टी और सबसे तेज

1980 में आया यह हाई-परफॉर्मेंस सिस्टम दो क्लच के साथ काम करता है।

• एक गियरबॉक्स में ऑड और दूसरे में इवन गियर रहते हैं, जिससे गियर प्री-इंगेज होते हैं।

फायदे: बेहद तेज शिफ्टिंग, कम पावर लॉस, शानदार परफॉर्मेंस।

नुकसान: लो-स्पीड में झटके, ज्यादा मेंटेनेंस और कम रिलायबिलिटी।

5. ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन (AMT): बजट सेगमेंट का फेवरिट

Ferrari ने इसे 1997 में अपनी कारों में पहली बार इस्तेमाल किया।

• इसमें मैनुअल गियरबॉक्स होता है लेकिन क्लच ऑपरेशन कंप्यूटर करता है।

फायदे: किफायती, आसान मेंटेनेंस, अच्छी एफिशिएंसी।

नुकसान: गियर शिफ्टिंग में जर्क और डिले, औसत परफॉर्मेंस।

6. इंटेलिजेंट मैनुअल ट्रांसमिशन (IMT): लेटेस्ट और ट्रैफिक-फ्रेंडली

• इसमें मैनुअल गियरबॉक्स तो रहता है लेकिन क्लच पैडल नहीं होता।

• क्लच को कंप्यूटर ऑटोमैटिकली कंट्रोल करता है।

फायदे: ट्रैफिक में आराम, मैनुअल जैसी एफिशिएंसी, कम कॉस्ट।

नुकसान: शिफ्टिंग में हल्का लैग, सीमित कारों में उपलब्ध।

कौन-सा ट्रांसमिशन कितने में पड़ता है?

कॉस्ट और परफॉर्मेंस तुलना:

  • MT: सबसे सस्ता, सबसे भरोसेमंद
  • AMT/IMT: किफायती और आसान
  • CVT/AT: ज्यादा स्मूथ पर महंगे
  • DCT: सबसे तेज पर सबसे महंगा और कम रिलायबल
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