मुहर्रम याद का महीना है। इसे बहुत पवित्र माना जाता है। मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है जिसे इस्लाम धर्म के पवित्र महीनों में से एक माना जाता है| महीने की शुरुआत इस बात पर निर्भर करती है कि अमावस्या का पहला अर्धचंद्र कब देखा जाता है। हर साल यह अलग-अलग दिन मनाया जाता है। इस साल 20 अगस्त को मुहर्रम है। मुहर्रम शब्द में इस्तेमाल होने वाले हराम शब्द का अर्थ है- किसी चीज पर पाबन्दी|
इस महीने के एक विशेष दिन सभी मुस्लिम लोग शोक मनाते है| इस दिन सभी लोग शोक मनाते है। इस दिन को शहीद श्रद्धांजलि देने के रूप में भी मनाया जाता है| मुहर्रम एक शोक दिवस है| मुहर्रम के महीने में 10 दिनों तक पैगम्बर मुहम्मद साहब के वारिस इमाम हुसैन की तकलीफों का शोक मनाया जाता है|
जंग में शहीद होने वाले लोगों की शहादत के रूप में मनाया जाता है और तजिकीया सजाकर इसे जाहिर किया जाता है| इस को आशूरा भी कहा जाता है। मुहर्रम में सुन्नी मुस्लिम 10 दिनों तक रोजा भी रखते है।
वहीं शिया मुस्लिम के लोग काले कपड़े पहनते है। मुहर्रम में ताजिया और जुलूस निकाले जाते है। मुहर्रम भारत के साथ पुरे देश में मनाया जायेगा। बीते 9 अगस्त की शाम चांद के बाद 1443 हिजरी की शुरुआत हो चुकी है।
इस्लाम मजहब में मुहर्रम गम का महीना माना जाता है। क्योंकि इसी महीने में इराक के कर्बला नामक जगह पर यजीद और इमाम हुसैन के बीच लड़ाई लड़ी गई थी।
कर्बला के युद्ध में पैंगम्बर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन सहित 72 साथियों ने शहादत दी थी। मुहर्रम महीने के अशूरा को इमाम हुसैन शहीद हुए थे। जो हिजरी कैलेंडर के अनुसार 19 अगस्त को पड़ रहा है। खासकर के शिया मुसलमान हुसैन की याद में मजलिस करके उन दिनों को याद करते हैं।