Prayagraj Land Dispute Poonam Dubey: यूपी के संगम नगरी प्रयागराज में जमीन कब्जे और रास्ते को लेकर चल रहे विवाद ने शुक्रवार को उस समय गंभीर रूप ले लिया, जब महिला अधिकार संगठन की कौशांबी जिला अध्यक्ष पूनम दुबे स्वयं पानी की टंकी पर चढ़ गईं। पूनम दुबे ने विवादित दान की गई जमीन को कब्जामुक्त कराने और प्रशासनिक अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने की मांग की है।
बता दें कि मामला भगवतपुर ब्लॉक क्षेत्र में मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते और तालाब के आसपास की जमीन से जुड़ा है। महिला अधिकार संगठन की जिला अध्यक्ष कौशांबी पूनम दुबे के परिजनों का आरोप है कि उनकी पैतृक जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही है। यहां मंदिर के लिए दान की गई जमीन के एक हिस्से को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है।
महिला अधिकार संगठन की जिला अध्यक्ष कौशांबी पूनम दुबे के बेटे प्रियांशु दुबे के नवभारत लाइव के संवाददाता से बातचीत कर बताया कि वर्ष 2020 में तत्कालीन एसडीएम सदर अजय नारायण सिंह के कार्यकाल के दौरान गांव में जल संरक्षण के उद्देश्य से यहां तालाब खुदवाया गया था। परिवार के मुताबिक संबंधित जमीन उनकी पैतृक जमीन है और वर्ष 1942 का बैनामा भी उनके पास मौजूद है।
परिजनों ने बताया कि तालाब बनाए जाने का उन्होंने विरोध नहीं किया। उन्होंने कहा कि इसी क्षेत्र में मंदिर निर्माण की बात सामने आई थी तब भी परिवार ने मंदिर के लिए जमीन दान करने पर भी सहमति दी और मंदिर निर्माण का कभी कोई विरोध नहीं किया।
पूनम दुबे के परिजनों का आरोप है कि मंदिर की तीन तरफ बाउंड्री वॉल बन चुकी है, लेकिन एक तरफ की बाउंड्री बनाने को लेकर विवाद हो रहा है। उनका दावा है कि उसी क्षेत्र में निजी जमीन पर कब्जा कर लिया गया है और जबरन करीब 25 से 30 फीट का रास्ता निकाले जाने की मांग की जा रही है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि इस मामले को लेकर वे लंबे समय से तहसील और राजस्व अधिकारियों से शिकायत कर रहे है , लेकिन इसका कोई स्थायी समाधान अभी तक नहीं मिल सका है। उनका आरोप है कि मौके पर अधिकारी भी पहुंचते हैं, जमीन की पैमाइश या रास्ते से संबंधित निर्देश भी दिए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद दोबारा बाउंड्री निर्माण शुरू करा दिया जाता है।
पूनम दुबे के बेटे ने आरोप लगाते हुए कि परिवार ने तहसील समाधान दिवस में भी उच्च अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखी थी, लेकिन परिवार को स्पष्ट समाधान या प्रभावी कार्रवाई का आश्वासन तक नहीं मिला।
पूनम दुबे के परिवार ने राजस्व विभाग के स्थानीय कर्मचारियों, लेखपाल और अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि शिकायत के बावजूद विवाद का स्थायी निस्तारण नहीं किया जा रहा है।
परिवारजनों का दावा है कि गुरुवार को अधिकारियों के सामने शिकायत रखने के बाद जब उनकी शिकायतें नहीं सुनी गई तब पूनम दुबे मानसिक रूप से परेशान हो गईं, उन्होंने रात में खाना भी नहीं खाया और शुक्रवार को अहले सुबह पानी की टंकी पर चढ़ गईं।
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस और अन्य लोग पहुंच गए। उन्हें नीचे उतारने का प्रयास किया गया। परिजनों ने मांग की है कि प्रशासनिक अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर जमीन की स्थिति स्पष्ट करें और विवाद का स्थायी समाधान निकालें।
पूनम दुबे के बेटे ने प्रशासन पर मामले की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि पूरे मामले में तहसील सदर की राजस्व टीम की भूमिका की जांच जरूर होनी चाहिए क्योंकि जिलाधिकारी स्तर से लेकर एसडीएम को मौके पर कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई क्य़ों नहीं हुई?
हालांकि, इस मामले में आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित एसडीएम, लेखपाल या अन्य राजस्व अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
परिजनों ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि विवादित जमीन की दोबारा निष्पक्ष पैमाइश कराई जाए, जमीन के स्वामित्व और रास्ते की स्थिति भी स्पष्ट की जाए तथा यदि कहीं अवैध कब्जा पाया जाता है तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जाए।
फिलहाल प्रयागराज पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता पूनम दुबे को सुरक्षित नीचे उतारना और मौके की स्थिति को नियंत्रित करना है। जमीन विवाद से जुड़े आरोपों पर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। खबर लिखे जाने तक पूनम दुबे पानी की टंकी से नीचे नही उतरी थी।
पानी की टंकी पर चढ़ी पूनम दुबे से जब नवभारत के पत्रकार ने बात की तो उन्होंने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि वह तालाब की जमीन से कब्जा हटाने और विवादित रास्ते को बंद कराकर जमीन की सीमा तय कराने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि सारा विवाद तालाब की जमीन और उसके किनारे बनाए जा रहे करीब 25 फीट के रास्ते को लेकर है।
जिसका पूनम दुबे पिछले करीब एक साल से विरोध कर रही हैं। इस मामले को लेकर वह पहले जिलाधिकारी और एसडीएम समेत कई अधिकारियों से बातचीत कर चुकी हैं। पूनम दुबे का कहना है कि उनके पूर्वजों की जमीन तालाब के लिए दी गई थी। तालाब की जमीन पर किसी प्रकार का अतिक्रमण के लिए उपयोग नहीं होना चाहिए। इसी मांग को लेकर वह पानी की टंकी पर चढ़ी है। उन्होंने मांग की है कि तब तक वहां डीएम नहीं पहुंच जाते है तब तक वह नीचे नहीं उतरेंगी।