पुतिन का तेवर देख घबराया US! दबाव में आकर ट्रंप ने दो रूसी क्रू मेंबरों को छोड़ा, क्या टल गया महायुद्ध?

US Russia Tension: US ने अटलांटिक महासागर में जब्त किए गए रूसी तेल टैंकर 'बेला-1' के क्रू सदस्यों को रिहा कर दिया है। पुतिन के कड़े रुख और रूसी नौसेना की तैनाती के बाद ट्रंप सरकार ने यह फैसला लिया।
Alarmed by Putin's stance, the US panicked! Under pressure, Trump released two Russian citizens. Has the threat of a world war been averted?
पुतिन और ट्रंप, (डिजाइन फोटो)
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US Russia Oil Tanker Dispute: अमेरिका और रूस के बीच एक पुराने खाली तेल टैंकर 'बेला-1' को लेकर छिड़ा विवाद अब नए मोड़ पर है। अटलांटिक महासागर में जहाज जब्त करने के बाद, रूसी राष्ट्रपति पुतिन के दबाव में डोनाल्ड ट्रंप ने जहाज पर सवार दो रूसी क्रू मेंबरों को रिहा करने का आदेश दिया है।

अमेरिका-रूस में क्यों बनी है टेंशन?

अमेरिका और रूस के बीच एक पुराने और जंग लगे खाली तेल टैंकर जिसे Bella 1 के नाम से जाना जाता है उसको लेकर जबरदस्त कूटनीतिक और सैन्य तनाव पैदा हो गया था। रूस ने इस टैंकर की सुरक्षा के लिए अपनी नौसेना और पनडुब्बी तक तैनात कर दी थी। हालांकि, बुधवार को अमेरिका ने आइसलैंड के पास अटलांटिक महासागर में इस जहाज पर कब्जा कर लिया था। रूस ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और अपने क्रू सदस्यों की तत्काल वापसी की मांग की। रूस के इस कड़े रुख के बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेजी दिखाते हुए जहाज पर सवार दो रूसी क्रू मेंबरों को रिहा करने का आदेश दे दिया है।

रूस ने किया अमेरिकी फैसले का स्वागत

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने पुष्टि की है कि रूस के कड़े विरोध के बाद अमेरिका ने रूसी क्रू सदस्यों को मुक्त कर दिया है। जखारोवा ने कहा कि हम इस फैसले का स्वागत करते हैं और अमेरिकी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। इसके साथ ही रूसी दूत किरिल दिमित्रिएव ने भी जानकारी साझा की कि डोनाल्ड ट्रंप ने टैंकर पर सवार 'सभी रूसियों' को रिहा करने का फैसला किया है।

'बेला 1' और शैडो फ्लीट का कनेक्शन

यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका ने इस जहाज को प्रतिबंधित कर दिया था। 'बेला 1', जिसे Marinera के नाम से भी जाना जाता है उस पर अमेरिका ने 2024 में प्रतिबंध लगाया था। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यह जहाज उन 'शैडो फ्लीट' टैंकरों का हिस्सा है जो अवैध रूप से ईरानी तेल की ढुलाई में शामिल रहे हैं।

समुद्र में लुका-छिपी और चकमा देने की कोशिश

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जहाज पिछले महीने तेल लेने के लिए वेनेजुएला की ओर जा रहा था तभी अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इसका पीछा करना शुरू कर दिया। उस समय जहाज पर गुयाना का झंडा लगा था।

अमेरिकी कोस्ट गार्ड से बचने के लिए जहाज अटलांटिक महासागर की ओर मुड़ गया और चालक दल ने जहाज के किनारे पर रूसी झंडा पेंट कर दिया ताकि उन्हें चकमा दिया जा सके। इसके बाद यह जहाज रूसी शिपिंग रजिस्टर में 'मैरिनेरा' नाम से दर्ज हो गया और रूस ने इसकी सुरक्षा के लिए अपनी नौसेना भेज दी, जिससे स्थिति युद्ध जैसी बन गई थी।

ब्रिटेन की मदद से हुई जब्ती

अमेरिका ने इस जहाज को कब्जे में लेने के लिए ब्रिटेन की भी मदद ली। इस जहाज पर कुल 28 क्रू मेंबर सवार थे जिनमें से 3 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि अभी रूसी नागरिकों की रिहाई की पुष्टि हुई है इसके साथ ही अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी प्रतीक्षित है।

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