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ईरान में जमीनी युद्ध की तैयारी: ट्रंप और नेतन्याहू का खार्ग द्वीप और होर्मुज पर कब्जे का मेगा प्लान
- Written By: प्रिया सिंह
Targeted Military Raids: US और इजरायल ईरान के खिलाफ सीमित जमीनी हमले और रणनीतिक ठिकानों जैसे खार्ग द्वीप पर कब्जे की योजना बना रहे हैं, जिससे पश्चिम एशिया में युद्ध का भारी खतरा और अधिक बढ़ गया है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (सोर्स-सोशल मीडिया)
US Military Strategic Ground Incursions: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और इजरायल अब ईरान के खिलाफ एक बड़ी जमीनी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। पेंटागन द्वारा तैयार इस रणनीति में सीमित लेकिन बेहद सटीक हमलों के जरिए अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। अमेरिकी सेना की रणनीतिक जमीनी घुसपैठ के इस मास्टरप्लान के तहत खार्ग द्वीप और होर्मुज जैसे क्षेत्रों पर नियंत्रण पाने की कोशिश की जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य ईरान की रक्षा प्रणाली को पूरी तरह पंगु बनाना और परमाणु ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
रणनीतिक ठिकानों पर कब्जे की योजना
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने एक ऐसी सैन्य योजना तैयार की है जो कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों तक चल सकती है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य ईरान के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप को अपने कब्जे में लेना या उसकी पूरी तरह नाकेबंदी करना है। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास के उन ठिकानों को भी खत्म करने की तैयारी है जहां से व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जाता है।
विशाल सैन्य बेड़े की तैनाती
अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को तेजी से बढ़ाते हुए आधुनिक युद्धपोत USS त्रिपोली को मिडिल ईस्ट के ऑपरेशनल जोन में सफलतापूर्वक तैनात कर दिया है। इस शक्तिशाली युद्धपोत पर करीब 2500 मरीन कमांडो सवार हैं जो किसी भी समय जमीनी हमले को अंजाम देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। त्रिपोली के साथ ही USS बॉक्सर और दो अन्य युद्धपोतों को भी इस क्षेत्र में पहुंचने के सख्त आदेश पेंटागन द्वारा दिए गए हैं।
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ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का असर
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार 28 फरवरी से शुरू हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अब तक ईरान के 11,000 से ज्यादा ठिकानों पर भीषण हमले किए जा चुके हैं। इस अभियान का मुख्य फोकस ईरान की मिसाइल प्रणालियों और वायु रक्षा तंत्र को पूरी तरह से कमजोर करना और उन्हें नष्ट करना है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दावों के विपरीत ईरान इन हमलों के बाद और भी अधिक आक्रामक रुख अपनाता हुआ दिखाई दे रहा है।
ईरान की जवाबी चेतावनी
ईरान ने अमेरिका और इजरायल को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर उसकी संप्रभुता पर हमला हुआ तो वह इसका बेहद खतरनाक और मुंहतोड़ जवाब देगा। ईरान ने बदला लेने के लिए इजरायल के डिमोना शहर और अन्य महत्वपूर्ण परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने का अल्टीमेटम भी आधिकारिक रूप से दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी जमीनी कार्रवाई इस पूरे क्षेत्र को एक विनाशकारी और लंबे युद्ध की आग में धकेल सकती है।
जमीनी युद्ध के बड़े जोखिम
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी जमीनी अभियान में अमेरिकी सैनिकों को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से बेहद कड़ी और घातक टक्कर मिलने की पूरी संभावना है। ईरान ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए ड्रोन और आधुनिक मिसाइल प्रणालियों का एक बड़ा सुरक्षा घेरा तैयार किया है जो चुनौती बन सकता है। हाल ही में हुए एक ईरानी हमले में 6600 करोड़ रुपये की कीमत वाला अमेरिकी E-3 Sentry (अवाक्स) विमान पूरी तरह तबाह हो चुका है।
यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट महायुद्ध: तेहरान यूनिवर्सिटी पर हमला और ईरान का इजरायल को डिमोना वाला अल्टीमेटम
अंतिम प्रहार की तैयारी
पेंटागन ने ‘एंड गेम’ के रूप में एक ऐसे विकल्प पर भी काम किया है जिसमें जमीनी कार्रवाई के साथ-साथ आसमान से भारी बमबारी शामिल होगी। इस योजना के तहत लारक और अबू मूसा जैसे रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा करके ईरान की सैन्य ताकत को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी दावा किया है कि अगर यह पूर्ण युद्ध शुरू होता है तो यह कुछ हफ्तों में समाप्त हो सकता है।
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