मिडिल ईस्ट महायुद्ध: तेहरान यूनिवर्सिटी पर हमला और ईरान का इजरायल को डिमोना वाला अल्टीमेटम

Iran Israel Conflict: मिडिल ईस्ट में 30 दिनों से जारी जंग के बीच ईरान ने तेहरान यूनिवर्सिटी पर हमले का बदला लेने के लिए इजरायल के डिमोना शहर को निशाना बनाने की खुली चेतावनी दी है। 
Middle East War: Iran Threatens Israel's Dimona After Tehran University Missile Attack
तेहरान यूनिवर्सिटी पर हमला (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Iran Israel Ground Operation Rumors: पश्चिम एशिया में पिछले 30 दिनों से चल रहा भीषण संघर्ष अब एक निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। तेहरान यूनिवर्सिटी पर हुए हालिया मिसाइल हमले के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव अपने चरम स्तर पर है। ईरान-इजरायल जमीनी अभियान की अफवाहें के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति की अपील कर रहा है लेकिन हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी ने इस महायुद्ध की आग में घी डालने का काम किया है।

तेहरान यूनिवर्सिटी पर हमला

मिडिल ईस्ट में जारी महायुद्ध के दौरान हाल ही में तेहरान यूनिवर्सिटी के परिसर पर एक बड़ा मिसाइल हमला किया गया है। इस हमले के बाद यूनिवर्सिटी परिसर में मलबे का ढेर लग गया है और वहां बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। ईरानी मीडिया आईआरएनए के अनुसार इस घटना ने पूरे देश में भारी रोष और प्रतिशोध की भावना को जन्म दिया है।

ईरान का डिमोना अल्टीमेटम

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी ने तेहरान यूनिवर्सिटी पर हमले की कड़ी निंदा करते हुए इजरायल को खुली चेतावनी दी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अब वह बदले की कार्रवाई में इजरायल के शैक्षणिक संस्थानों और डिमोना शहर को निशाना बनाएगा। इससे पहले भी नतांज पर हमले के बाद ईरान ने इजरायल के परमाणु ठिकानों के पास मिसाइलें दागकर अपनी क्षमता दिखाई थी।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की नाकेबंदी

इस वैश्विक महायुद्ध का सबसे संवेदनशील केंद्र स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बना हुआ है जो दुनिया की तेल सप्लाई का मुख्य रास्ता है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग की नाकेबंदी कर दी है जिससे अमेरिका और अन्य देशों की चिंताएं बहुत अधिक बढ़ गई हैं। अमेरिका किसी भी तरह इस रास्ते को दोबारा खुलवाने की कोशिश कर रहा है क्योंकि इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

अमेरिकी नौसेना की बड़ी तैनाती

तनाव को देखते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मिडिल ईस्ट के ऑपरेशनल जोन में अपने घातक युद्धपोत 'USS त्रिपोली' को तैनात कर दिया है। इस आधुनिक युद्धपोत पर करीब 2500 मरीन कमांडो सवार हैं जो किसी भी समय जमीनी हमले को अंजाम देने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा USS बॉक्सर और अन्य कई युद्धपोतों को भी इस क्षेत्र में तुरंत पहुंचने के सख्त आदेश दिए गए हैं।

ग्राउंड ऑपरेशन की बढ़ती चर्चा

अमेरिका द्वारा हजारों मरीन सैनिकों की तैनाती के बाद अब ईरान के खिलाफ एक बड़े जमीनी हमले यानी 'ग्राउंड ऑपरेशन' की अटकलें तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार वॉशिंगटन में ईरान की पूरी तरह घेराबंदी करने के लिए एक विस्तृत और लंबी सैन्य योजना पर काम चल रहा है। हालांकि ईरानी नेतृत्व ने ऐसे किसी भी विदेशी हस्तक्षेप का डटकर मुकाबला करने की कसम खाई है और हमले तेज कर दिए हैं।

एपिक फ्यूरी और भविष्य की राह

अमेरिकी प्रशासन 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के जरिए ईरान के लगभग 11,000 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचने का दावा कर रहा है। दूसरी ओर ईरान इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए अपने मिसाइल हमलों की तीव्रता को पहले से अधिक बढ़ा रहा है। फिलहाल दोनों ही पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं जिससे आने वाले समय में संघर्ष के और भीषण होने के संकेत मिल रहे हैं।

हूती और हिज्बुल्ला की सक्रियता

इस युद्ध में लेबनान के हिज्बुल्ला के साथ-साथ अब यमन के हूती विद्रोही भी सीधे तौर पर ईरान के समर्थन में सक्रिय हो गए हैं। हूती विद्रोहियों ने रेगिस्तान से अमेरिका और इजरायल की ओर कई मिसाइलें दागी हैं जिससे युद्ध का दायरा काफी बढ़ गया है। इजरायल अब एक साथ कई मोर्चों पर सैन्य दबाव का सामना कर रहा है जो उसकी सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती है।

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