अमेरिका और आर्मेनिया के बीच ‘123 न्यूक्लियर डील’, क्या अब रूस-ईरान का खेल होगा खत्म?
US Armenia Nuclear Deal: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आर्मेनिया के साथ '123 एग्रीमेंट' पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परमाणु डील से अब आर्मेनिया की रूस-ईरान पर निर्भरता कम होगी।
- Written By: अमन उपाध्याय
जेडी वेंस और आर्मेनिया के पीएम निकोल पशिनयान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US Armenia 123 Agreement: दक्षिण काकेशस क्षेत्र में भू-राजनीतिक समीकरण बड़ी तेजी से बदल रहे हैं। एक ऐतिहासिक पहल के तहत अमेरिका और ईरान के पड़ोसी देश आर्मेनिया के बीच सिविल न्यूक्लियर क्षेत्र में एक बेहद अहम समझौता हुआ है।
सोमवार को आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस डील पर हस्ताक्षर किए। खास बात यह है कि किसी भी अमेरिकी उपराष्ट्रपति की यह पहला आर्मेनिया दौरा है जो इस क्षेत्र में अमेरिका की बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है।
क्या है ‘123 एग्रीमेंट’ और यह क्यों है खास?
इस रणनीतिक समझौते को ‘123 एग्रीमेंट’ के नाम से जाना जाता है। यह एक कानूनी ढांचा है जो अमेरिका को किसी दूसरे देश को परमाणु तकनीक, संवेदनशील उपकरण और परमाणु ईंधन निर्यात करने की अनुमति देता है। इस डील के जरिए अमेरिका शुरुआत में आर्मेनिया को करीब 5 अरब डॉलर की परमाणु तकनीक और उपकरण मुहैया कराएगा। आने वाले वर्षों में ईंधन की आपूर्ति और रखरखाव से संबंधित लगभग 4 अरब डॉलर के अतिरिक्त समझौतों की भी उम्मीद है।
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रूस और ईरान पर निर्भरता कम करने की रणनीति
आर्मेनिया दशकों से अपनी ऊर्जा जरूरतों और सुरक्षा के लिए रूस और ईरान पर निर्भर रहा है। आर्मेनिया में वर्तमान में केवल एक परमाणु संयंत्र, मेत्सामोर कार्यरत है जिसे सोवियत संघ के समय रूस की मदद से बनाया गया था। यह प्लांट अब काफी पुराना हो चुका है।
आर्मेनिया अब एक नया परमाणु रिएक्टर बनाना चाहता है और इसके लिए वह रूस, चीन, फ्रांस और दक्षिण कोरिया के प्रस्तावों के साथ-साथ अमेरिका की ओर भी देख रहा है। इस नए ‘123 एग्रीमेंट’ से अमेरिकी कंपनियों के लिए आर्मेनिया में परमाणु रिएक्टर बनाने की राह आसान हो गई है और इससे रूस का एकाधिकार खत्म हो सकता है।
रूस और ईरान को बाईपास करने का प्लान
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के इस दौरे का एक और महत्वपूर्ण पहलू ‘ट्रंप रूट फॉर इंटरनेशनल पीस एंड प्रॉस्पेरिटी’ (TRIPP) योजना है। यह 43 किलोमीटर लंबा एक रणनीतिक कॉरिडोर है जो दक्षिणी आर्मेनिया से होकर गुजरेगा। यह कॉरिडोर न केवल अजरबैजान को उसके नखचिवान क्षेत्र और तुर्की से जोड़ेगा, बल्कि एशिया और यूरोप के बीच व्यापार के लिए रूस और ईरान को पूरी तरह बाईपास कर देगा।
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वेंस ने इसे दोनों देशों के लिए समृद्धि और शांति का मार्ग बताया है। आर्मेनिया के प्रधानमंत्री ने इस समझौते को दोनों देशों के संबंधों में एक ‘नया अध्याय’ करार दिया है जबकि अमेरिका इसे ऊर्जा सहयोग को नई दिशा देने वाला कदम मान रहा है।
