
रूसी तेल पर संकट (सोर्स-सोशल मीडिया)
India Cuts Russian Oil Imports: यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस ने भारत और चीन जैसे एशियाई देशों को रियायती दरों पर तेल देना शुरू किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद अब भारत ने रूसी तेल के आयात में काफी कटौती कर दी है जिससे रूस दबाव में है। वर्तमान में हिंद महासागर और अन्य समुद्री तटों के पास करीब एक दर्जन रूसी तेल टैंकर बिना किसी खरीदार के महीनों से भटक रहे हैं। कच्चे तेल की अधिक आपूर्ति और खरीदारों की कमी के कारण रूस के लिए अब अपने इस अतिरिक्त तेल को खपाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात घटकर अब औसतन 12 लाख बैरल प्रति दिन के स्तर पर आ गया है। साल 2024 के मध्य में भारत रूस से प्रतिदिन करीब 20 लाख बैरल तेल खरीद रहा था लेकिन अब भारतीय रिफाइनरियां नए ऑर्डर टाल रही हैं। ट्रंप ने दावा किया था कि भारत रूसी तेल की खरीद पूरी तरह बंद करेगा लेकिन हकीकत में भारत ने केवल अपनी खरीद को काफी कम किया है।
ग्लोबल शिपिंग फर्म केपलर के मुताबिक कम से कम 12 टैंकर हिंद महासागर और मलेशिया व चीन के तटों के पास से गुजर रहे हैं। इन टैंकरों में रूस के प्रमुख कच्चे तेल ग्रेड ‘यूराल्स’ के करीब 1.2 करोड़ बैरल लदे हुए हैं जिनका कोई तय खरीदार अब तक नहीं मिला है। खरीदार न मिलने की वजह से रूसी टैंकरों के डेस्टिनेशन बार-बार बदल रहे हैं जिससे तेल की आपूर्ति श्रृंखला में भारी अनिश्चितता बनी हुई है।
चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियों ने जनवरी में यूराल्स की रिकॉर्ड खरीद की थी लेकिन अब वे हल्के ग्रेड जैसे ईएसपीओ और सोकोल को प्राथमिकता दे रही हैं। एक रूसी तेल टैंकर जिस पर 5 करोड़ डॉलर मूल्य का 7.5 लाख बैरल कच्चा तेल लदा है वह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में खड़ा है। सुरक्षा निगरानी के कड़े स्तरों के कारण चीन इस जहाज को अपने किसी भी बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति देने के लिए फिलहाल बिल्कुल तैयार नहीं है।
महीनों से समंदर में फंसे इन रूसी जहाजों पर तैनात क्रू के पास अब मीट, अनाज और मछली जैसी बुनियादी चीजों की भारी कमी हो गई है। जहाज पर मौजूद एक अधिकारी इवान ने बताया कि क्रू सदस्य भूखे और गुस्से में हैं क्योंकि उन्हें कई महीनों से वेतन भी नहीं दिया गया था। इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन ने हस्तक्षेप कर कुछ सदस्यों का बकाया वेतन दिलवाया है और जहाज पर जरूरी राशन पहुंचाने की विशेष व्यवस्था की है।
ग्लोबल मार्केट में तेल की प्रचुर आपूर्ति के कारण रूस के लिए भारत के विकल्प के रूप में नए खरीदार ढूंढना अब और भी ज्यादा मुश्किल हो गया है। यूराल्स कच्चे तेल से भरे कई अन्य टैंकर भी अटलांटिक और लाल सागर से एशिया की ओर बढ़ रहे हैं लेकिन उनकी मंजिल अब तक तय नहीं है। इंडोनेशिया जैसे देश भी कभी-कभार रूसी तेल खरीदते हैं लेकिन वे भी हल्के तेल ग्रेड को ही अधिक पसंद करते हैं जिससे रूस का संकट बढ़ गया है।
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डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दावा किया था कि व्यापार समझौते के तहत भारत अब अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदने पर सहमत हुआ है। यद्यपि भारत सरकार ने तेल खरीद को लेकर कोई आधिकारिक निर्देश जारी नहीं किया है लेकिन रिफाइनरियों के व्यवहार से खरीद में गिरावट साफ दिख रही है। भारत द्वारा अपनी ऊर्जा रणनीति में किए जा रहे इन बदलावों का असर सीधे तौर पर रूस के राजस्व और उसकी वैश्विक तेल अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।






