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Bangladesh Elections: जमात के पहले हिंदू उम्मीदवार बने कृष्णा नंदी, 80 अल्पसंख्यकों को मिला टिकट

Hindu Candidate Jamaat: बांग्लादेश चुनाव में 80 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में हैं। जमात-ए-इस्लामी ने पहली बार कृष्णा नंदी के रूप में एक हिंदू उम्मीदवार को टिकट दिया है, जो एक बड़ी राजनीतिक घटना है।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Feb 10, 2026 | 03:11 PM

जमात-ए-इस्लामी हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी (सोर्स - सोशल मीडिया)

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Minority Participation In Bangladesh Elections: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय संसदीय चुनावों में इस बार अल्पसंख्यकों की अभूतपूर्व भागीदारी देखी जा रही है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार इस बार कुल 80 अल्पसंख्यक उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाने के लिए चुनावी मैदान में उतरे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने पहली बार एक हिंदू उम्मीदवार को अपना प्रत्याशी बनाया है। आवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के कारण अब देश में बीएनपी और जमात जैसे दलों की राजनीतिक भूमिका पहले से काफी मजबूत हो गई है।

रिकॉर्ड अल्पसंख्यक भागीदारी

चुनाव आयोग की रिपोर्ट बताती है कि 80 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों में से 12 लोग स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे हैं। इन कुल उम्मीदवारों में महिलाओं की संख्या 10 है जो इस बार चुनावी रण में अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रही हैं। कुल 22 राजनीतिक दलों ने मिलकर 68 अल्पसंख्यक चेहरों को टिकट दिया है जिससे चुनावी मुकाबला काफी रोचक हो गया है।

कृष्णा नंदी का ऐतिहासिक नामांकन

जमात-ए-इस्लामी ने खुलना-1 सीट से एक हिंदू व्यवसायी कृष्णा नंदी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर पहली बार इतिहास रचा है। कृष्णा नंदी साल 2003 से ही इस पार्टी से जुड़े हुए हैं और उनकी सीट हिंदू बहुल क्षेत्र होने के कारण इसे रणनीतिक कदम माना जा रहा है। यह पहली बार है जब किसी कट्टरपंथी मानी जाने वाली पार्टी ने किसी अल्पसंख्यक को चुनावी टिकट देकर सबको हैरान कर दिया है।

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स्वतंत्र उम्मीदवार गोबिंद प्रमाणिक

गोपालगंज-3 सीट से हिंदू महाजोत के महासचिव गोबिंद चंद्र प्रमाणिक स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। शुरुआत में चुनाव आयोग ने उनकी नामांकन पर्ची खारिज कर दी थी लेकिन अपील के बाद उसे दोबारा बहाल कर दिया गया है। प्रमाणिक की मजबूत दावेदारी ने इस सीट पर अन्य राजनीतिक दलों के समीकरणों को काफी हद तक उलझा कर रख दिया है।

राजनीतिक दलों का गणित

बांग्लादेश कम्युनिस्ट पार्टी ने सबसे अधिक 17 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को टिकट दिया है जो सभी दलों में सबसे ज्यादा संख्या है। वहीं दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल बीएनपी ने इस चुनाव में कुल 6 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। कुल 60 पंजीकृत दल आयोग के पास हैं लेकिन आवामी लीग के निलंबन के बाद मैदान अब अन्य दलों के लिए खुल चुका है।

आवामी लीग के बिना चुनाव

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को इस बार चुनाव लड़ने से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। अगस्त में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहला बड़ा चुनाव है जिसे बीएनपी के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पसंख्यक नेतृत्व की बढ़ती भागीदारी नए राजनीतिक समीकरण बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

रणनीतिक बदलाव और चुनौतियां

विशेषज्ञों का कहना है कि जमात द्वारा हिंदू उम्मीदवार उतारना अपनी कट्टरपंथी छवि को बदलने की एक सोची-समझी कोशिश हो सकती है। आवामी लीग की अनुपस्थिति में यह दल अल्पसंख्यक वोटों को अपनी ओर खींचने के लिए नए-नए प्रयोग और गठजोड़ कर रहे हैं। बांग्लादेश की राजनीति में यह बदलाव आने वाले समय में देश के लोकतांत्रिक ढांचे और सामाजिक ताने-बाने को नई दिशा दे सकता है।

यह भी पढ़ें: Bangladesh Election 2026: AI वीडियो और क्रिकेट बने राजनीति का नया हथियार, सोशल मीडिया पर छिड़ी डिजिटल जंग

चुनाव आयोग की भूमिका

चुनाव आयोग ने इस बार नामांकन प्रक्रिया में काफी सख्ती दिखाई है जिसके कारण कई उम्मीदवारों को कानूनी अपील का सहारा लेना पड़ा। आयोग ने 12 फरवरी को होने वाले मतदान के लिए सुरक्षा और निष्पक्षता के पुख्ता इंतजाम करने का दावा पूरी तरह किया है। स्वतंत्र उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि आम जनता अब पारंपरिक राजनीतिक दलों के विकल्प भी तलाश रही है।

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Published On: Feb 10, 2026 | 03:11 PM

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