
कीर स्टार्मर, कीर स्टार्मर
UK political Crisis: ब्रिटेन की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के खिलाफ उनकी ही लेबर पार्टी के भीतर बगावत की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में बेचैनी बढ़ा दी है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, डाउनिंग स्ट्रीट में असाधारण सुरक्षा और प्रबंधन अभियान शुरू किया गया है, ताकि किसी भी तरह के अंदरूनी राजनीतिक हमले को रोका जा सके। स्टार्मर की टीम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संभावित ‘आंतरिक तख्तापलट’ की आशंकाओं को गंभीरता से ले रही है।
सूत्रों का दावा है कि लेबर पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता खास तौर पर हेल्थ सेक्रेटरी वेस स्ट्रीटिंग चुपचाप नेतृत्व परिवर्तन की रणनीति पर काम कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि करीब 50 प्रभावशाली लेबर सांसदों का समूह स्ट्रीटिंग के समर्थन में खड़ा है। ये सांसद पार्टी नेतृत्व में बदलाव के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं और परिस्थितियां अनुकूल होते ही पीएम स्टार्मर की कुर्सी को चुनौती देने की कोशिश कर सकते हैं।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि यह सियासी हमला दो संभावित मौकों पर हो सकता है पहला, इस महीने आने वाले बजट ऐलान के बाद, और दूसरा, मई में होने वाले स्थानीय चुनावों के परिणाम आने के बाद। इन दोनों मौकों पर यदि स्टार्मर की लोकप्रियता या पार्टी की स्थिति और कमजोर दिखी, तो बगावत का जोखिम बढ़ सकता है।
स्टार्मर के दफ्तर के करीबी सूत्रों के अनुसार, टीम फिलहाल डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई है। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर किसी भी तरह की नेतृत्व चुनौती को इस समय आत्मघाती कदम माना जाएगा। मगर इन चेतावनियों के बावजूद लेबर पार्टी में असंतोष तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि वेस स्ट्रीटिंग ने इस पूरे विवाद को “बकवास” बताते हुए खारिज किया है, लेकिन हलचल थमी नहीं है।
स्टार्मर की गिरती लोकप्रियता भी उनके लिए बड़ी चुनौती बन गई है। हालिया सर्वे बताते हैं कि वे आधुनिक ब्रिटिश इतिहास के सबसे कम लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में शामिल हो गए हैं। सर्वे एजेंसी इप्सोस (Ipsos) के अनुसार, केवल 13% मतदाता ही स्टार्मर के कामकाज से संतुष्ट हैं, जबकि 79% लोग असंतोष जता रहे हैं। यही नहीं, लेबर पार्टी लंबे समय से नाइजेल फराज की राइट-विंग पार्टी रिफॉर्म यूके से पीछे चल रही है, जिसने राजनीतिक संतुलन को हिला कर रख दिया है।
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ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव, लगातार बढ़ती टैक्स दर, महंगाई और गिरते जीवन स्तर ने जनता में नाराजगी बढ़ाई है। इमिग्रेशन नीति को लेकर भी स्टार्मर को लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इन सभी कारणों की वजह से लेबर के भीतर असंतोष उबल रहा है और नेतृत्व परिवर्तन की आवाजें उठने लगी हैं।






