
ब्रिटेन में 'ग्रूमिंग गैंग' का आतंक, सांकेतिक फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Pakistani Grooming Gangs News: ब्रिटेन में सक्रिय पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग्स अपने संगठित नेटवर्क और कमजोर अल्पसंख्यक समुदायों विशेषकर सिख और हिंदू लड़कियों को निशाना बनाने के आरोपों को लेकर लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस सिलसिलेवार शोषण को ‘ब्रिटिश इतिहास का शांति काल का सबसे बड़ा अपराध और उसे ढकने की कोशिश’ करार दिया है। एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि ये गिरोह दशकों से संगठित बाल यौन शोषण से जुड़े रहे हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, ये गिरोह आम तौर पर 11 से 16 वर्ष की कमजोर पृष्ठभूमि की लड़कियों को निशाना बनाते हैं। शुरुआत में प्यार, तोहफों और दोस्ती का भरोसा दिलाया जाता है। इसके बाद पीड़ितों को परिवार और समाज से अलग-थलग कर ब्लैकमेल, धमकी और आर्थिक शोषण के जाल में फंसाया जाता है, यहां तक कि तस्करी जैसे अपराधों में भी धकेला जाता है।
रिपोर्ट में वेस्ट लंदन के हाउंसलो की एक घटना का उल्लेख है जहां 15 वर्षीय सिख लड़की के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया गया। बताया गया कि लड़की को 34 वर्षीय व्यक्ति के फ्लैट में बंधक बनाकर रखा गया और उसके साथ बार-बार यौन हिंसा की गई। इस मामले में कथित तौर पर छह तक आरोपी शामिल बताए गए जिन्हें एक संगठित ग्रूमिंग गैंग का हिस्सा माना जा रहा है।
मामला तब सार्वजनिक हुआ, जब घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसके बाद सिख समुदाय के 200-300 लोग आरोपियों के आवास के बाहर एकत्र हुए और त्वरित न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान संपत्ति की सुरक्षा में तैनात पुलिस से झड़पें भी हुईं। अंततः समुदाय के हस्तक्षेप से पीड़िता को बचाया गया, जिससे कथित पुलिस निष्क्रियता को लेकर गहरी नाराजगी सामने आई।
रिपोर्ट के अनुसार, यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। इससे पहले रॉदरहैम, रोचडेल और टेलफोर्ड जैसे कस्बों में सामने आए घोटालों ने ब्रिटेन को झकझोर दिया था। 2014 की एलेक्सिस जे रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 1997 से 2013 के बीच रॉदरहैम में कम से कम 1,400 बच्चों के साथ यौन शोषण हुआ। रिपोर्ट में अधिकांश आरोपियों की पहचान एशियाई, मुख्यतः पाकिस्तानी मूल के लोगों के रूप में की गई।
पीड़ितों ने अपने बयान में शहरों के बीच तस्करी, हथियारों से धमकी और हिंसक यौन हमलों जैसे भयावह अनुभवों का जिक्र किया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि राजनीतिक शिष्टाचार और नस्लवाद के आरोपों के डर ने समय रहते जांच को प्रभावित किया, जिससे ये गिरोह वर्षों तक बिना रोक-टोक काम करते रहे।
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पिछले वर्ष ‘द ऑस्ट्रेलिया टुडे’ की एक रिपोर्ट में भी कहा गया था कि ब्रिटेन में हुए बड़े पैमाने के आव्रजन-विरोधी प्रदर्शनों के पीछे दशकों से सुलगती नाराजगी रही है। यह नाराजगी उन संस्थागत विफलताओं से जुड़ी बताई गई, जिनमें ग्रूमिंग गैंग घोटाले प्रमुख हैं। हालांकि, कई प्रदर्शनों में विदेशी-विरोधी बयानबाजी भी देखने को मिली, जिसने बहस को और जटिल बना दिया।






