तुर्किए पुलिस ने काटा परिवहन मंत्री का चालान, 225 की स्पीड से चला रहे थे गाड़ी- VIDEO

Turkey News: तुर्किए के परिवहन मंत्री अब्दुलकादिर उरलोग्लु पर 225 किमी/घंटा की रफ्तार से गाड़ी चलाने के आरोप में जुर्माना लगा, उन्होंने गलती मानी और सोशल मीडिया पर माफी मांगी।
तुर्किए पुलिस ने काटा परिवहन मंत्री का चालान, 225 की स्पीड से चला रहे थे गाड़ी- VIDEO
अब्दुलकादिर उरलोग्लु (फोटो- सोशल मीडिया)
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Turkey Police Fined Transport Minister: यूरोपीय देश तुर्किए से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां टैरिफ पुसिल ने ओवर स्पीडिंग के आरोप में तुर्किए के परिवहन मंत्री अब्दुलकादिर उरलोग्लु का चालान काटा है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उरलोग्लु पर आरोप है कि वो हाईवे पर 225 किमी/घंटा की रफ्तार से गाड़ी चले रहे थे। जिसका वीडियो उन्हें खुद सोशल मीडिया पर शेयर किया था।

वायरल वीडियो में परिवहन मंत्री अब्दुलकादिर उरलोग्लु तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते नजर आ रहे हैं। वीडियो में वह अंकारा-निग्द हाईवे पर 225 किमी/घंटा की रफ्तार से गाड़ी चला रहे थे। यह रफ्तार तुर्किए में तय गति सीमा से लगभग दोगुनी है। वीडियो में वह राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन के भाषण को सुनते हुए हाईवे पर तेज रफ्तार में ड्राइव कर रहे थे।

उरलोग्लु ने जनता से मांगी माफी

सोशल मीडिया पर उरलोग्लु का वीडियो वायरल होने के बाद तुर्किए की ट्रैफिक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मंत्री पर 9,267 लीरा (लगभग 19,831 रुपये) का जुर्माना लगाया। खुद उरलोग्लु ने सोशल मीडिया पर इस जुर्माने की जानकारी साझा करते हुए अपनी गलती स्वीकार की और जनता से माफी मांगी।

उन्होंने कहा कि वह हाईवे की वर्तमान स्थिति की जांच कर रहे थे और अनजाने में गाड़ी की स्पीड कुछ समय के लिए तय सीमा से ऊपर चली गई। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में वह गाड़ी चलाते समय और अधिक सावधानी बरतेंगे।

लोग कर रहे हैं ट्रोल

हालांकि, माफी मांगने के बावजूद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। एक यूजर ने पूछा कि क्या मंत्री की टीम में कोई ऐसा नहीं था जो उन्हें स्पीड लिमिट क्रॉस करने से रोक सके? वहीं, कुछ लोगों ने मंत्री से इस्तीफे की मांग भी कर डाली।

आलोचकों का मानना है कि जैसे एक आम नागरिक को नियम तोड़ने पर दंड भुगतना पड़ता है, वैसे ही किसी मंत्री को भी गलती की ज़िम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। यह घटना एक बार फिर से यह उजागर करती है कि जनता सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों से कितनी अधिक ज़िम्मेदारी और जवाबदेही की अपेक्षा रखती है। दूसरी ओर, कुछ लोग इसे एक अनजानी भूल मानते हुए उरलोग्लु को माफ करने की बात भी कर रहे हैं।

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