ईरान से दोस्ती करना चाहते हैं राष्ट्रपति ट्रंप, NATO समिट में दिया बड़ा हिंट

ईरान-इजराइल युद्धविराम के बाद ट्रंप ने बदला रुख, उन्होंने NATO समिट में ईरान को बहादुर देश बताया। ट्रंप ने कहा, मैं चाहूं तो ईरान के तेल व्यापार रोक सकता हूं, लेकिन नहीं करूंगा।
ईरान से दोस्ती करना चाहते हैं राष्ट्रपति ट्रंप, NATO समिट में दिया बड़ा हिंट
ईरान से दोस्ती चाहते हैं ट्रंप (फोटो- सोशल मीडिया)
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एम्स्टर्डम: ईरान और इजराइल के बीच युद्धविराम के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। ट्रंप जहां कल तक ईरान को बर्बाद करने और तख्तापलट करने के संकेत दे रहे थे, वहीं अब वो ईरान की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। ट्रंप ने ईरान को बहादुर देश बताया है।

डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को नीदरलैंड्स में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) समिट में शामिल हुए। यहां उन्होंने इजराइल-ईरान युद्ध पर बोलते हुए कहा कि ईरान ने बहादुरी से जंग लड़ी। ट्रंप ने कहा, "वो तेल का व्यापार करते हैं, मैं चाहूं तो इस पर प्रतिबंध लगा सकता हूं, लेकिन मैं ऐसा नहीं करूंगा।" ट्रंप के इस बयान को अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता को लेकर अहम कदम माना जा रहा है।

ट्रंप ने दिए सकारात्मक संकेत

ट्रंप ने कहा, "ईरान के परमाणु स्थलों पर हाल में हुए अमेरिकी हमलों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। यह अध्याय या तो बेहतर साबित हो सकता है या फिर और भी बुरा।" उन्होंने कहा, "लगभग आधी सदी के दौरान दुनिया ने दोनों देशों के बीच दुश्मनी के कई दौर देखे हैं। ईरान के लिए जहां अमेरिका सबसे बड़ा शैतान है, तो वहीं अमेरिका की नजर में ईरान पश्चिम एशिया में फसाद की जड़ है।"

डोनाल्ड ट्रंप के लहजे में यह बदलाव इस सप्ताह ईरान के परमाणु स्थलों पर अमेरिका की भीषण बमबारी, कतर में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के जवाबी लेकिन संयमित हमले और इजराइल-ईरान युद्ध में उनकी ओर से किए गए अस्थायी युद्धविराम के बाद आया है। ट्रंप ने अपने भाषण में "ईश्वर ईरान का भला करे" जैसे शब्द भी कहे जो संकेत देते हैं कि ट्रंप ईरान के साथ दुश्मनी भूलकर दोस्ती करना चाहते हैं।

युद्धविराम से खुश हैं ट्रंप

इससे पहले ट्रंप ने युद्धविराम पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे उपलब्धि बताया और खुशी जताई थी। हालांकि तब तक इजराइल और ईरान पूरी तरह से युद्धविराम पर सहमत नहीं हुए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "ईश्वर इजराइल का भला करे। ईश्वर ईरान का भला करे।" उन्होंने पश्चिम एशिया, अमेरिका और विश्व को भी शुभकामनाएं दीं। जब यह स्पष्ट हो गया कि शत्रुता तुरंत समाप्त नहीं हुई है, तो उन्होंने शपथ ग्रहण करना शुरू कर दिया।

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