306 बेड वाले सिद्धार्थ अस्पताल परियोजना में देरी, मुंबई महापौर ने मांगी समयबद्ध कार्ययोजना

Goregaon West स्थित सिद्धार्थ मनपा सर्वसाधारण अस्पताल के पुनर्विकास में हो रही देरी पर मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने नाराजगी जताई।  अधिकारियों को परियोजना जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
Ritu Tawde
रितु तावड़े (सौ. सोशल मीडिया )
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BMC Mayor Review On Goregaon Siddtharth Hospital: गोरेगांव (पश्चिम) स्थित सिद्धार्थ मनपा सर्वसाधारण अस्पताल के पुनर्विकास कार्य में हो रही देरी को लेकर मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

शुक्रवार को गोरेगांव स्थित परियोजना स्थल का अचानक दौरा कर उन्होंने निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को परियोजना की वर्तमान स्थिति तथा उसे पूरा करने की स्पष्ट कार्ययोजना तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

महापौर रितु तावड़े पी दक्षिण प्रभाग समिति अध्यक्ष पद की चुनाव प्रक्रिया के सिलसिले में गोरेगांव पहुंची थीं। इसी दौरान उन्होंने सिद्धार्थनगर स्थित अस्पताल पुनर्विकास परियोजना का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नगरसेवक हर्ष पटेल, नगरसेविका प्रीति साटम, उप आयुक्त (परिमंडल-4) डॉ। भाग्यश्री कापसे, अस्पताल आधारभूत संरचना विभाग के सहायक अभियंता रविंद्रनाथ यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

306 बेड वाले अस्पताल का पुनर्विकास शुरू

अधिकारियों ने जानकारी दी कि सिद्धार्थनगर, गोरेगांव पश्चिम, जोगेश्वरी पश्चिम, मालाड पश्चिम, मालवणी और आरे कॉलोनी क्षेत्रों की लगभग 8 से 10 लाख आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 306 बेड क्षमता वाले इस अस्पताल का पुनर्विकास शुरू किया गया है। परियोजना का निर्माण कार्य 10 अप्रैल 2023 को शुरू हुआ था और इसे 36 महीनों में, यानि अप्रैल 2026 तक पूरा किया जाना था।

11 मंजिला दो इमारतों में से 10 मंजिल तक निर्माण पूरा

  • हालांकि, मानसून के दौरान खुदाई में भूस्खलन, शवविच्छेदन केंद्र के स्थानांतरण, उपयोगिता लाइनों के बदलाव तथा अन्य प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से परियोजना में देरी हुई है। वर्तमान में अस्पताल की 11 मंजिला दो इमारतों में से 10 मंजिल तक का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
  • जबकि कर्मचारी और रेजिडेंट मेडिकल अधिकारी आवास की 21 मंजिला इमारतों में 20 मंजिल तक का काम पूरा बताया गया है। निरीक्षण के बाद महापौर ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी परियोजना में दो वर्ष की देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।
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