
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया)
Trump Billion-Dollar Board of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी में शांति और पुनर्निर्माण के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय निकाय, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace), बनाने की घोषणा की है। यह पहल गाजा में स्थायी शांति स्थापित करने और वहां की शासन व्यवस्था को पुनर्संगठित करने के उद्देश्य से की गई है। ट्रंप खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे और इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, वर्ल्ड बैंक सहित कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सदस्य शामिल होंगे।
बोर्ड ऑफ पीस गाजा में डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना के दूसरे चरण का हिस्सा है। इसके तहत बोर्ड का मुख्य कार्य गाजा के विसैन्यीकरण, मानवीय सहायता वितरण और वहां एक ‘टेक्नोक्रेटिक’ (विशेषज्ञों पर आधारित) अंतरिम फिलिस्तीनी सरकार के गठन की देखरेख करना होगा। ट्रंप ने बोर्ड में शामिल प्रमुख नामों का भी ऐलान किया है, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के CEO मार्क रोवन, वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल शामिल हैं।
इस बोर्ड में भारत, पाकिस्तान, वियतनाम सहित कई देशों को आमंत्रित किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तीन साल से अधिक की स्थायी सदस्यता के लिए सदस्य देशों को गाजा के पुनर्निर्माण हेतु 1 बिलियन डॉलर (करीब 8,300 करोड़ रुपये) का योगदान देना होगा। जो देश यह राशि नहीं देंगे, उनकी सदस्यता केवल तीन साल के लिए होगी।
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गाजा में इस तीन स्तरीय शासन मॉडल का काम इस प्रकार होगा: सबसे ऊपर बोर्ड ऑफ पीस, मध्य स्तर पर गाजा कार्यकारी बोर्ड और निचले स्तर पर नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) होगी। गाजा कार्यकारी बोर्ड अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व और जमीनी प्रशासन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा, जिसमें तुर्की, कतर, मिस्र और UAE के क्षेत्रीय प्रतिनिधि, वर्ल्ड बैंक और नीदरलैंड के अधिकारी शामिल होंगे। NCAG केवल फिलिस्तीनी विशेषज्ञों का समूह है, जिसके प्रमुख डॉ. अली शाथ हैं।
हालांकि, इस बोर्ड की आलोचना भी हुई है। इजरायल ने कहा है कि इस कार्यकारी बोर्ड के गठन में उनसे समन्वय नहीं किया गया। कुछ यूरोपीय देशों और पश्चिमी राजनयिकों ने चेतावनी दी है कि यह ‘ट्रंप यूनाइटेड नेशंस’ संयुक्त राष्ट्र के काम को कमजोर कर सकता है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप चाहते हैं कि बोर्ड की भूमिका गाजा से परे भी अन्य वैश्विक संघर्षों में बढ़ाई जाए, जिससे यह विश्व स्तर पर शक्तिशाली अंतरराष्ट्रीय निकाय बन सकता है।
व्हाइट हाउस ने बताया कि बोर्ड का उद्देश्य प्रभावी शासन और गाजा के लोगों के लिए स्थिरता, शांति और समृद्धि सुनिश्चित करना है। ट्रंप के इस नए मंच के जरिए यह प्रयास किया जाएगा कि गाजा के पुनर्निर्माण और शांति प्रक्रिया में वैश्विक भागीदारी सुनिश्चित हो और क्षेत्रीय नेताओं के साथ सहयोग बढ़े।
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गाजा में दो साल के सैन्य संघर्ष के बाद यह बोर्ड वहां की जनता के लिए पुनर्निर्माण और स्थायित्व की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब यह देखने वाली बात होगी कि ट्रंप के नेतृत्व वाला यह अंतरराष्ट्रीय बोर्ड किस हद तक गाजा में स्थायी शांति और प्रशासनिक सुधार ला पाएगा।
Ans: बोर्ड ऑफ पीस गाजा में शांति, पुनर्निर्माण और शासन व्यवस्था की निगरानी के लिए बनाया गया एक नया अंतरराष्ट्रीय निकाय है।
Ans: इस बोर्ड के अध्यक्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होंगे। इसके अलावा इसमें कई और बड़े नाम भी शामिल हैं।
Ans: गाजा का विसैन्यीकरण, मानवीय सहायता वितरण और एक तकनीकी अंतरिम फिलिस्तीनी सरकार का गठन कराना।
Ans: आलोचकों का कहना है कि यह संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकता है और इसे “ट्रंप का अपना यूएन” माना जा रहा है।






