तख्तापलट के बाद नेपाल को मिलेगी पहली महिला PM! बालेन का पत्ता साफ, आगे आया सुशीला कार्की का नाम

Nepal News: नेपाल में तख्तापलट के बाद अंतरिम सरकार की चर्चा तेज है। पहली महिला चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को पीएम बनने का प्रस्ताव मिला है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है।
तख्तापलट के बाद नेपाल को मिलेगी पहली महिला PM! बालेन का पत्ता साफ, आगे आया सुशीला कार्की का नाम
सुशीला कार्की (फोटो- सोशल मीडिया)
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Sushila Karki Nepal: नेपाल में तख्तापलट के बाद सत्ता की चाबी सेना के हाथ में है। इसी बीच अंतरिम सरकार को लेकर कवाहद तेज हो गई है। इस समय नेपाल की सत्ता के गलियारों से नए प्रधानमंत्री को लेकर अब तक कई नाम सामने आ चुके हैं, इसी में एक नाम सुशीला कार्की का भी है। जिन्हें लेकर कहा जा रहा है कि जल्द ही देश की कमान संभाल सकती है।

जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारी जेन जी ने नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार की कमान संभालने का प्रस्ताव दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। जेन जी ने इस फैसले की जानकारी फोन पर सुशीला कार्की को दी, जिसे उन्होंने मंजूर कर लिया। हालांकि भी तक इसे लेकर कोई आधिकारिक सूचना सामने नही आई है। प्रदर्शनकारी पहले काठमांडू के मेयर बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनना की मांग कर रह थे।

राजनीतिक दलों के साथ रहा टकराव

मीडिया रिपोर्टस में मिली जानकारी के अनुसार, अगर सुशीला कार्की प्रधानमंत्री पद स्वीकार करती है तो ये नेपाल के इतिहास के नया अध्याय लिखने जैसा होगा। कार्की न सिर्फ देश की पहली महिला चीफ जस्टिस बनी हैं, बल्कि अब वे पहली महिला प्रधानमंत्री भी बन सकती हैं। आंदोलनकारियों ने आज की बैठक में स्पष्ट किया कि दुर्गा परसाईं, रासपा और राप्रपा का नई सरकार में कोई दखल नहीं होगा और सरकार की कमान सुशीला कार्की के हाथों में होगी। जेन जी पहले बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन राजनीति में उनके अनुभव की और सेना का विश्वाश न होने का कारण उन्हें तरजीह नहीं दी गई।

बता दें कि, 2017 में प्रमुख राजनीतिक दलों ने सुशीला कार्की पर पूर्वाग्रह और कार्यपालिका में हस्तक्षेप का आरोप लगाया था, जिसके चलते उन पर महाभियोग प्रस्ताव भी पेश किया गया था। लेकिन देश में उन्हें मिले व्यापक जन समर्थन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण राजनीतिक दलों ने यह प्रस्ताव वापस ले लिया था, जो उनकी जनप्रियता को दर्शाता है।

रिटायरमेंट के बाद लिखी किताबें

सुशीला कार्की की खासियतों में यह भी शामिल है कि अपने रिटायरमेंट के बाद उन्होंने दो किताबें लिखीं। पहली उनकी आत्मकथा ‘न्याय’ है, जिसमें उन्होंने अपनी जिंदगी, न्यायिक संघर्षों और राजनीतिक दबाव की कहानी साझा की है। दूसरी किताब ‘कारा’ एक उपन्यास है, जो उनकी हिरासत के अनुभवों से प्रेरित है और महिलाओं के सामाजिक संघर्षों को उजागर करता है।

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