हिंसा के बाद नेपाल में अंतरिम सरकार का गठन, सुशीला कार्की बनेगी प्रधानमंत्री, 4 मंत्री भी लेंगे शपथ

Nepal Gen Z Protest: नेपाल में पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं। वे पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। संसद भंग होने और जेन-जेड आंदोलन के बाद उनका चयन ऐतिहासिक माना जा रहा है।
हिंसा के बाद नेपाल में अंतरिम सरकार का गठन, सुशीला कार्की बनेगी प्रधानमंत्री, 4 मंत्री भी लेंगे शपथ
सुशीला कार्की (फोटो- सोशल मीडिया)
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Sushila Karki Nepal New PM: नेपाल हाल ही में हुए जेन जी आंदोलन के बाद, देश को नई अंतरिम प्रधानमंत्री मिल गई है। संसद को भंग किए जाने के बाद अब पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री का पद संभालेंगी। वह आज रात 8:45 पर प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगी। इस बात की जानकारी नेपाल के मेयर बालेन शाह के समर्थकों ने दी।

सुशीला कार्की का प्रधानमंत्री बनना नेपाल के इतिहास के लिए गौरवपूर्ण पल है। वह नेपाल में प्रधानमंत्री पद संभालने वाली पहली महिला होंगी। लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही थीं कि जेन-जेड आंदोलन के दौर में उनके नेतृत्व की संभावना बन रही है। हालांकि, अब यह औपचारिक रूप से तय हो गया है।

चार और मंत्री ले सकते हैं शपथ

स्थानीय मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, कार्की के अलावा चार और नेता मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इनमें कुलमान घीसिंग, ओम प्रकाश अर्याल, बालानंद शर्मा का नाम शामिल है। यह वो नेता हैं जिन्हें नेपाल के जेन जी समूहों का समर्थन हासिल है। कुलमान घीसिंग नेपाल के जाने-माने इंजीनियर हैं। उन्हें नेपाल में घर-घर तक बिजली पहुंचाने के लिए जाना जाता है।

इससे पहले कुलमान घीसिंग का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाए जाने की सूचना थी। हालांकि, पूर्ण समर्थन मिलने के कारण उनका नाम वापस ले लिया गया। अब वह नेपाल में कोई बड़ा मंत्रालय संभाल सकते हैं। घीसिंग के अलावा ओम प्रकाश अर्याल नेपाली साहित्यकार हैं। वहीं, बालानंद शर्मा भी नेपाल के एक विख्यात साहित्यकार, कवि और शिक्षाविद हैं। उन्हें नेपाली भाषा और साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है।

कार्की का भारत से खास कनेक्शन

सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं। इससे पहले वह नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रह चुकी हैं। कार्की का भारत से खास रिश्ता है। उन्होंने भारत के बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। नेपाल में उनकी छवि एक ईमानदार जज की रही है। 2017 में नेपाल की सभी राजनीतिक पार्टियों ने मिलकर उनके खिलाफ महाभियोग चलाया था। उन पर यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका से बाहर निकलकर कार्यपालिका के मामलों में हस्तक्षेप किया है, तथा पूर्वाग्रह दिखाया है। हालांकि वह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया और कोर्ट ने उनके निलंबन को अवैध करार देते हुए पुनः उन्हें चीफ जस्टिस के पद पर बहाल किया।

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