NASA से लेकर UN तक अलर्ट! धरती के बेहद करीब आया 'एलियन', क्या कुछ बड़ा होने वाला है?

Comet 3I/ATLAS: हमारे सौरमंडल के बाहर से आया रहस्यमय धूमकेतु वैज्ञानिकों की नजरों का केंद्र बना हुआ है। 19 दिसंबर को यह पृथ्वी के सबसे नजदीक से गुजरेगा जिससे ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने का अहम...
From NASA to the UN, everyone is on alert! An 'alien' object has come extremely close to Earth. Is something big about to happen?
धूमकेतु 3I/ATLAS, सांकेतिक फोटो (सो.सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

ESA Comet Update: हमारे सौरमंडल में इन दिनों एक बेहद दुर्लभ और अजीबोगरीब अंतरिक्ष मेहमान की चर्चा जोरों पर है। वैज्ञानिक इसे कभी संभावित खतरे के रूप में देखते हैं, तो कभी इसे ब्रह्मांड को समझने का सुनहरा मौका मानते हैं। यह रहस्यमय धूमकेतु है 3I/ATLAS, जो 19 दिसंबर को पृथ्वी के सबसे नजदीक से गुजरने वाला है।

3I/ATLAS की खास बात यह है कि यह हमारे सौरमंडल का हिस्सा नहीं है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह धूमकेतु किसी दूसरे तारे के आसपास बना और अब कुछ समय के लिए हमारे सौरमंडल से होकर गुजर रहा है। सरल शब्दों में कहें तो यह हमारे लिए एक “इंटरस्टेलर” या “एलियन” मेहमान है, जो अपनी झलक दिखाकर फिर अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों में लौट जाएगा।

अब तक पहचाना गया तीसरा इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट

इस धूमकेतु की खोज 1 जुलाई को चिली में स्थित नासा द्वारा फंड किए गए ATLAS टेलीस्कोप से की गई थी। 3I/ATLAS अब तक पहचाना गया तीसरा इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट है। इससे पहले 2017 में 1I/ओउमुआमुआ और 2019 में 2I/बोरिसोव जैसे दुर्लभ ऑब्जेक्ट्स ने वैज्ञानिकों को चौंकाया था। इन तीनों ने यह साबित किया कि हमारा सौरमंडल ब्रह्मांड में अकेला नहीं है बल्कि दूसरे तारों के सिस्टम से भी जुड़ा हुआ है।

क्या पृथ्वी के लिए कोई खतरा है?

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के अनुसार, 3I/ATLAS पृथ्वी के लगभग 1.8 खगोलीय इकाई (AU) की दूरी से गुजरेगा, जो करीब 27 करोड़ किलोमीटर है। यह दूरी पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी से लगभग दोगुनी है। ऐसे में वैज्ञानिक साफ तौर पर कह रहे हैं कि यह धूमकेतु पृथ्वी के लिए किसी भी तरह का खतरा नहीं है।

वैज्ञानिकों के लिए क्यों है खास?

हालांकि यह धूमकेतु सुरक्षित दूरी से गुजर रहा है लेकिन रिसर्च के लिहाज से यह बेहद अहम है। जब 3I/ATLAS सूर्य के पास पहुंचेगा, तो इसकी बर्फीली सतह गर्म होगी और इससे गैस व धूल बाहर निकलेंगी। इन कणों के अध्ययन से वैज्ञानिक यह समझ पाएंगे कि दूसरे तारों के आसपास धूमकेतु कैसे बनते हैं और ग्रहों की शुरुआती सामग्री कैसी होती है।

NASA से लेकर UN तक नजर

लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस इंटरस्टेलर धूमकेतु पर नासा ही नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र की भी नजर है। UN के इंटरनेशनल एस्टेरॉयड वार्निंग नेटवर्क (IAWN) ने 3I/ATLAS ऑब्जर्विंग कैंपेन का लगभग आधा काम पूरा कर लिया है। इस नेटवर्क में दुनियाभर के वैज्ञानिक शामिल हैं जो पृथ्वी के पास से गुजरने वाले खगोलीय पिंडों पर लगातार रिसर्च करते हैं।

पिछले कुछ महीनों से दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां और ऑब्जर्वेटरीज इस धूमकेतु पर नजर बनाए हुए हैं। हाल ही में हबल स्पेस टेलीस्कोप और JUICE जुपिटर मिशन द्वारा ली गई तस्वीरों में यह धूमकेतु सौरमंडल के भीतर तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई दिया है।

इंटरस्टेलर धूमकेतु जैसे 3I/ATLAS बहुत कम देखने को मिलते हैं। ये न सिर्फ वैज्ञानिकों के लिए बल्कि मानवता के लिए भी यह समझने का मौका होते हैं कि हमारा सौरमंडल ब्रह्मांड के बाकी हिस्सों से कैसे जुड़ा हुआ है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com