'बिना मेरी बात सुने ही...', सजा-ए-मौत के फैसले पर शेख हसीना का आया पहला रिएक्शन, छलका दर्द

Sheikh Hasina News: बांग्लादेश की ICT ने शेख हसीना को आज मौत की सजा सुनाई है। भारत में शरण लिए हसीना ने इस फैसले को राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए कहा कि उन्हें न अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया।
'Without even listening to me...', Sheikh Hasina's first reaction to the death penalty verdict, expressing her pain
शेख हसीना, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Sheikh Hasina First Reaction to the Death Sentence Verdict: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वहां के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT-BD) ने छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों पर घातक दमन का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है।

पिछले साल 5 अगस्त को उनकी सरकार गिरने के बाद से हसीना भारत में रह रही हैं। इस बीच कोर्ट ने उन्हें भगोड़ा घोषित करते हुए मुकदमे की सुनवाई जारी रखी और अब उनका नाम फैसले में मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है।

मुझे सुना नहीं गया

फैसले के बाद शेख हसीना ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यह फैसला एकतरफा, राजनीतिक और पहले से तय था। उनका कहना है कि ट्रिब्यूनल एक गैर-निर्वाचित सरकार के नियंत्रण में है, जिसके पास जनता का जनादेश नहीं है। हसीना ने आरोप लगाया कि उन्हें न अपना पक्ष रखने दिया गया और न ही उनके वकील को अदालत में पेश होने का मौका दिया गया। उन्होंने कहा, “ICT में कुछ भी अंतरराष्ट्रीय नहीं है। यह सिर्फ एक उपकरण है, जिसका इस्तेमाल मुझे और अवामी लीग को राजनीतिक रूप से समाप्त करने के लिए किया जा रहा है।”

1400 मौतों की जिम्मेदारी हसीना

ICT ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह स्थापित करने में सफल रहा कि 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच ‘जुलाई विद्रोह’ के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों में सुरक्षा बलों द्वारा की गई घातक कार्रवाई का आदेश हसीना ने ही दिया था। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, इस एक महीने लंबे आंदोलन में कम से कम 1,400 लोग मारे गए थे। ट्रिब्यूनल ने पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान को भी मौत की सजा और एक पुलिस अधिकारी को सरकारी गवाह बनने पर पांच साल की सजा सुनाई है।

यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप

हसीना ने मौजूदा यूनुस सरकार पर आरोप लगाया कि सेना और प्रशासन ने उनके समर्थकों के खिलाफ प्रतिशोधी कार्रवाई की, जिसमें अवामी लीग नेताओं के सैकड़ों घर, दुकानें और संपत्तियां लूटी गईं। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने विपक्ष की हिंसा को नजरअंदाज कर सिर्फ अवामी लीग के लोगों को निशाना बनाया।

अब आगे की कानूनी राह क्या?

बांग्लादेश की कानूनी व्यवस्था के अनुसार, मौत की सजा पाने वाला कोई भी व्यक्ति हाई कोर्ट में अपील कर सकता है। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू याचिका दायर की जा सकती है।

यदि सुप्रीम कोर्ट भी सजा बरकरार रखता है, तो आरोपी राष्ट्रपति से माफी की गुहार लगा सकता है। राष्ट्रपति द्वारा माफी अस्वीकार किए जाने पर फांसी की सजा लागू कर दी जाती है।

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