
शरीफ उस्मान हादी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Bangladesh Osman Hadi Murder: बांग्लादेश पुलिस ने पुष्टि की है कि शरीफ उस्मान हादी की हत्या राजनीतिक प्रतिशोध के कारण हुई थी। हादी को अवामी लीग और इसके छात्र संगठन छात्र लीग के इशारे पर मारा गया। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (DMP) की डिटेक्टिव ब्रांच के अतिरिक्त आयुक्त मोहम्मद शफीकुल इस्लाम ने प्रेस ब्रीफिंग में इस बात का खुलासा किया।
शफीकुल इस्लाम ने बताया कि इस मामले में कुल 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी गई है। उन्होंने कहा कि हादी ने सार्वजनिक रैलियों और सोशल मीडिया पर अवामी लीग और छात्र लीग की गतिविधियों की कड़ी आलोचना की थी, जिससे छात्र लीग और उससे जुड़े संगठनों के नेता-कार्यकर्ता नाराज थे। हालांकि चार्जशीट में कही पर भी भारत या भारतीय एजेंसियों का नाम नहीं है।
पुलिस जांच में यह सामने आया कि हत्या के पीछे राजनीतिक प्रतिशोध का मकसद था। हादी अवामी लीग की छात्र इकाई छात्र लीग से जुड़े नेताओं की आलोचना करते थे और उनके बयानों ने उन्हें निशाना बनाया। छात्र लीग अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग का छात्र संगठन है। चार्जशीट के अनुसार, 17 आरोपियों में से 12 को गिरफ्तार किया जा चुका है,जबकि बाकी अभी फरार हैं।
शरीफ उस्मान हादी जो 32 साल के थे और इंकलाब मंच के प्रवक्ता थे। जुलाई-अगस्त 2024 में हुए बड़े छात्र आंदोलनों के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। यह आंदोलन शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुआ था और उसने राजनीतिक हलचल पैदा की थी। हादी आगामी 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव में ढाका-8 सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाले थे।
पुलिस ने मुख्य आरोपी फैसल करीम मसूद को शूटर बताया जो सीधे छात्र लीग से जुड़ा हुआ था। जांच में पता चला कि हत्या पल्लबी थाना के पूर्व काउंसलर और युवा लीग नेता तैजुल इस्लाम चौधरी बप्पी के इशारे पर की गई। बप्पी ने मसूद और दूसरे मुख्य संदिग्ध आलमगीर शेख को भागने में मदद की।
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गृह मामलों के सलाहकार जहांगीर आलम चौधरी ने बताया कि चार्जशीट 7 जनवरी को दाखिल करने की योजना थी, लेकिन ढाका में न्याय की मांग को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच पुलिस ने इसे एक दिन पहले यानी 6 जनवरी 2026 को कोर्ट में जमा कर दिया। इस्लाम ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ सबूत पर्याप्त हैं और सभी आरोप पूरी तरह साबित हो चुके हैं। हादी की हत्या मामले ने बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा और चुनावी तनाव बढ़ा दिया है।






