9वीं मंजिल पर थे पत्रकार...उपद्रवियों ने नीचे लगा दी आग, महिला पत्रकार ने बताई खौफनाक दास्तान

Bangladesh Violence News: बांग्लादेश में छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद हिंसा भड़क उठी, मीडिया दफ्तरों पर हमले हुए, पत्रकारों को फंसा लिया गया, और देशभर में अराजकता फैल गई।
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बांग्लादेश में पत्रकारों पर हमला (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Daily Star Reporter Zyma Islam Facebook Post: बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद देशभर में हिंसा और अराजकता फैल गई है। ढाका समेत कई शहरों में रात भर हंगामा और आगजनी जारी रही। प्रदर्शनकारियों ने बड़े मीडिया संस्थानों जैसे डेली स्टार और प्रथोम आलो के दफ्तरों पर हमला किया, जिसके कारण कई पत्रकारों को अंदर ही फंसा रहना पड़ा। इस बीच, डेली स्टार की रिपोर्टर जायमा इस्लाम ने फेसबुक पर एक पोस्ट किया जिसने पूरी दुनिया को परेशान कर दिया।

जायमा इस्लाम ने अपने फेसबुक पोस्ट बताया कि आगजनी के कारण बहुत धुंआ भर गया था और उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उन्होंने लिखा, "मैं अब सांस नहीं ले पा रही हूं। बहुत ज्यादा धुआं है। मैं अंदर हूं। तुम लोग मुझे मार रहे हो।" उनके इस पोस्ट पर दुनियाभर से लोगों ने चिंता जताई है।

छात्र नेता की मौत के बाद हिंसा

यह हिंसा 32 वर्षीय छात्र नेता और इंकलाब मंच के प्रवक्ता उस्मान हादी की हत्या के बाद शुरू हुई। हादी को 12 दिसंबर को ढाका में चुनाव प्रचार करते समय नकाबपोश हमलावरों ने सिर में गोली मार दी थी। इसके बाद उन्हें सिंगापुर इलाज के लिए भेजा गया, लेकिन उनकी मौत हो गई। हादी की मौत की खबर के बाद ढाका और देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे।

प्रदर्शनकारियों ने मीडिया संस्थानों पर आरोप लगाया कि वे भारत समर्थक हैं और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के पक्ष में काम कर रहे हैं। कई इमारतों में आग लगा दी गई, जिसमें दो प्रमुख अखबारों के दफ्तर भी शामिल थे। डेली स्टार के दफ्तर में आग लगने के बाद 27 कर्मचारी अंदर फंसे रहे, जिन्हें सुबह तक बाहर निकाला गया।

बांग्लादेश राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित

बांग्लादेश की सरकार ने हादी की मौत को "देश के लिए बड़ा नुकसान" बताया है और शनिवार को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है। पुलिस ने हमलावरों की तलाश तेज कर दी है और दो संदिग्धों की तस्वीरें जारी की हैं। सुरक्षा बलों को कई शहरों में तैनात किया गया है, लेकिन हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हिंसा पर काबू नहीं पाया गया, तो यह बांग्लादेश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

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