ईरान युद्ध से दुनिया में ‘तेल का प्रलय’! सऊदी अरामको की बड़ी चेतावनी, 120 डॉलर के पार पहुंचा क्रूड ऑयल
Iran US War Oil Crisis: सऊदी अरामको के CEO अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि ईरान-अमेरिका युद्ध लंबा खिंचा तो वैश्विक तेल बाजार पर 'विनाशकारी असर' पड़ेगा। तेल भंडार 5 साल के निचले स्तर पर है।
- Written By: अमन उपाध्याय
सऊदी अरामको की बड़ी चेतावनी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Saudi Aramco CEO Warning: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर एक डरावनी चेतावनी जारी की है। मंगलवार को अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमीन नासिर ने कहा कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा यह युद्ध यदि लंबा खिंचता है तो इसका वैश्विक तेल बाजार पर ‘विनाशकारी असर’ पड़ सकता है।
5 साल के निचले स्तर पर तेल भंडार
अमीन नासिर के मुताबिक, युद्ध और उससे पैदा हुई सप्लाई की दिक्कतों की वजह से दुनिया भर में तेल का भंडार पिछले पांच सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने आगाह किया कि यदि मौजूदा भू-राजनीतिक संकट के कारण तेल सप्लाई में रुकावट जारी रहती है, तो भंडार और तेजी से घटेगा। इससे न केवल तेल बाजार बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
होर्मुज की खाड़ी पर बढ़ा संकट
अरामको प्रमुख ने Strait of Hormuz के सामरिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान पर हमलों के बाद तेहरान ने इस खाड़ी को बंद करने का फैसला किया है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई बाधित हुई है। सामान्य तौर पर इस रास्ते से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई होती है।
सम्बंधित ख़बरें
US Airstrikes: जॉर्डन बेस पर हमले के बाद भड़के ट्रंप, ईरान पर अमेरिका ने फिर से शुरू की एयरस्ट्राइक
एक व्यक्ति भी जीवित बचा तब भी… पाक सेना की गोलीबारी के बीच JAAC का बड़ा ऐलान, 48 घंटे में 31 की मौत
PoK चुनाव में जीत के बाद मरियम का बिलावल पर तंज, बोलीं- रोने-धोने से नहीं बदलेगा जनादेश; हार स्वीकार करे PPP
Antarctica Ice Melt से समुद्र का जलस्तर बढ़ने का भारी खतरा, तबाही से बचने का समय है बहुत कम
उत्पादन में भारी गिरावट
युद्ध के कारण खाड़ी देशों में तेल उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सऊदी अरामको ने अपने दो प्रमुख क्षेत्रों में उत्पादन कम कर दिया है और वह निर्यात के लिए यान्बू बंदरगाह जैसे वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है, जो कि होर्मुज की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इराक का तेल उत्पादन 70 प्रतिशत तक गिर गया है, जबकि कतर एनर्जी ने अपने रास लफ्फान सेंटर पर एलएनजी उत्पादन रोक दिया है। कुवैत, कतर, इराक और बहरीन जैसे देशों ने असाधारण परिस्थितियों का हवाला देते हुए तेल शिपमेंट पर ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर दिया है।
यह भी पढ़ें:- कनाडा में US दूतावास पर चलीं गोलियां, टेक्सास के ‘अल्लाह’ टी-शर्ट से जुड़ा कनेक्शन; निशाने पर पश्चिमी ठिकाने
2022 के बाद सबसे महंगा हुआ तेल
इन तमाम संकटों के चलते वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इस हफ्ते ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है जो 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष जारी रहा, तो ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं।
