ढाका में भगवान राम की विशाल प्रतिमा पर लगी रोक, धार्मिक स्वतंत्रता पर छिड़ी जंग; बांग्लादेश सरकार पर उठे सवाल
Bangladesh News: बांग्लादेश में बन रही भगवान राम की विशाल प्रतिमा के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। पलाशबाड़ी उपजिला में स्थित श्रीश्री राधागोविंद और काली मंदिर परिसर में यह प्रतिमा बनाई जा रही थी।
- Written By: स्निग्धा श्रीवास्तव
राम मूर्ति विवाद (सोर्स- सोशल मीडिया)
Ram Idol Controversy In Bangladesh: बांग्लादेश में बन रही भगवान राम की विशाल प्रतिमा के निर्माण पर प्रशासन ने रोक लगा दी है, जिससे विवाद छिड़ गया है। बता दें कि बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला में स्थित श्रीश्री राधागोविंद और काली मंदिर परिसर में भगवान राम की प्रतिमा बनाई जा रही थी, जिसे प्रशासन रूकवा दिया। मामलें को लेकर लेखिका तस्लीमा नसरीन और हिन्दू संगठनों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा बताते हुए कड़ी निंदा की है।
दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा के निर्माण पर रोक
बताया जा रहा है कि यहां दुनिया की सबसे बड़ी भगवान राम की प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा था। जिसे बांग्लादेश के अधिकारियों ने निलंबित करने का आदेश दे दिया है। यह प्रतिमा बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबारी उपजिला में स्थित श्री श्री राधा गोविंदा और काली मंदिर के परिसर में लगाई जा रही थी।
बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक मंदिर के सलाहकार श्याममल कुमार महंत ने गुरुवार शाम मंदिर सभागार में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान यह जानकारी दी थी। बांग्लादेश सरकार के इस फैसले के बाद तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। आरोप लगाया गया है कि भगवान राम की प्रतिमा का निर्माण इस्लामी समूहों के दबाव में रोका गया है।
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तस्लीमा नसरीन ने उठाए सवाल
लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने भगवान राम मंदिर के निर्माण के निलंबन की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस देश में कई लाख मस्जिदें हैं और कई का निर्माण जारी है। वहां केवल हिंदू पूजा स्थल को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? नसरीन ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बांग्लादेश में कई लाख मस्जिदें हैं और नई मस्जिदों को निर्माण हो भी रहा हैं। फिर भगवान राम की मूर्ति के निर्माण का इतना विरोध क्यों? अगर धार्मिक स्वतंत्रता सबके लिए है, तो यह हिन्दू अल्पसंख्यकों पर भी समान रूप से लागू होनी चाहिए, न कि केवल बहुसंख्यकों पर।
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लेखिका तस्लीमा नसरीन ने आगे कहा कि पालाशबारी, गाइबांधा में निर्माणाधीन राम मंदिर के खिलाफ मिल रही धमकियां और नफरत भरी बयानबाजी बेहद चिंताजनक है। किसी भी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए किसी दूसरे समुदाय के पूजा स्थल को गिराने का अधिकार नहीं मिल सकता क्योंकि उन्हें वह पसंद नहीं है। नसरीन ने सवाल उठाया ‘दुनिया भर के कई मुस्लिम बहुल देशों में बड़े-बड़े हिंदू मंदिर हैं। लेकिन वहां मंदिरों का अस्तित्व उनके लिए खतरा नहीं माना जाता। तो फिर बांग्लादेश में एक मंदिर के निर्माण को लेकर इतना बवाल क्यों?
बांग्लादेशी समाचार पत्र ‘ब्लिट्ज’ के संपादक ने भी जताई चिंता
बता दें कि बांग्लादेशी समाचार पत्र ‘ब्लिट्ज’ के संपादक सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने भी भगवान राम के विशाल प्रतिमा के निर्माण के रुकने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा कि बांग्लादेश के गाइबांधा जिले में चल रहे सनातन परिसर के अधिकारियों ने स्थानीय जिहादी और इस्लामी समूहों के दबाव में आकर भगवान राम की मूर्ति का निर्माण रोकने की घोषणा की है।
धार्मिक स्वतंत्रता पर उठे सवाल
भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण पर रोक केवल एक निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है। अब यह मामला बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक अधिकारों और सामाजिक सौहार्द से जुड़े व्यापक सवालों का है। सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर सभी समुदायों के अधिकारों की समान सुरक्षा की मांग की है।
