Afghanistan: बुर्के के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर अंधाधुंध फायरिंग, मासूम सहित दो लोगों की मौत
Taliban Shot Dead Women: अफगानिस्तान में बुर्का नियम और गिरफ्तारियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर तालिबान ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं। इस हिंसक कार्रवाई में एक मासूम बच्चे समेत दो की मौत हो गई।
- Written By: अमन उपाध्याय
अफगानिस्तान में महिलाओं पर अंधाधुंध फायरिंग, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Taliban Shot Dead Women Burqa Protest: अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तहत महिलाओं के मौलिक अधिकारों का दमन एक बार फिर रक्तरंजित संघर्ष में बदल गया है। पश्चिमी अफगानिस्तान के हेरात शहर में तालिबानी लड़ाकों ने बुर्का पहनने के अनिवार्य नियम और हालिया गिरफ्तारियों के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिलाओं पर सीधे गोलियां बरसा दीं।
संयुक्त राष्ट्र (UN) और वहां के लोगों के अनुसार, इस क्रूर कार्रवाई में कम से कम दो लोगों की जान चली गई है, जिनमें एक मासूम बच्चा भी शामिल है। इसके अलावा, 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
क्या है पूरा विवाद?
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब हेरात की तालिबानी मोरैलिटी पुलिस ने शनिवार को उन महिलाओं को हिरासत में लेना शुरू किया, जिन्होंने पूरे शरीर को ढकने वाला बुर्का नहीं पहना था। तालिबान के ‘सदाचार प्रसार और बुराई रोकथाम मंत्रालय’ द्वारा लागू नियमों के तहत महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलते समय लगभग पूरा शरीर ढंकना अनिवार्य है।
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हालांकि, कई महिलाएं पारंपरिक बुर्के के बजाय ढीला अबाया और सिर व चेहरे को ढंकने वाले स्कार्फ का उपयोग करती हैं, जिसे तालिबान प्रशासन अपने आदेशों का उल्लंघन मान रहा है।
बंदूक के दम पर दबाया गया प्रदर्शन
मंगलवार को तालिबान की इस दमनकारी नीति के विरोध में दर्जनों महिलाएं सड़कों पर उतर आईं। प्रदर्शनकारी महिलाएं अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ नारेबाजी कर रही थीं। प्रदर्शन को तितर-बितर करने के लिए तालिबान ने सुरक्षा बलों का सहारा लिया और बल प्रयोग के साथ-साथ सीधी फायरिंग शुरू कर दी।
Afghan women being cracked down and arrested in public places for the violation of Taliban’s so-called dress code. The Taliban forces have opened fire at the protestors leaving them injured or dead. All they chanted was “Education, Work, Freedom”! #StandWithAfghanWomen pic.twitter.com/weio314yYI — Zeinab (@ZMohammad92) June 12, 2026
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि सुरक्षा बलों ने भीड़ पर गोलियां चलाईं, जिससे वहां भगदड़ मच गई। हालांकि, स्थानीय तालिबानी पुलिस ने किसी भी तरह के हथियार का इस्तेमाल करने से इनकार किया है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट और जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
संयुक्त राष्ट्र की कड़ी निंदा
इस घटना पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) द्वारा नियुक्त 10 स्वतंत्र विशेषज्ञों के एक समूह ने गहरी चिंता व्यक्त की है।, विशेषज्ञों ने एक बयान जारी कर कहा कि महिलाओं को ड्रेस कोड उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लेना ‘मनमानी और गैरकानूनी’ हो सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, महिलाओं को केवल उनके अधिकारों का उपयोग करने के लिए सजा दी जा रही है, जो मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। विशेषज्ञों ने तालिबान प्रशासन से हिंसा तुरंत रोकने और गिरफ्तार की गई महिलाओं को रिहा करने की मांग की है।
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अफगानी महिलाओं का बढ़ता संघर्ष
अफगानिस्तान में जब से तालिबान ने सत्ता संभाली है, महिलाओं पर पाबंदियों का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। शिक्षा से लेकर रोजगार और अब पहनावे तक पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। इसके बावजूद, अफगानी महिलाएं अपनी स्वतंत्रता के लिए जोखिम उठाकर प्रदर्शन कर रही हैं। हेरात की यह घटना दर्शाती है कि तालिबान अब विरोध की किसी भी आवाज को दबाने के लिए खून-खराबे पर उतर आया है।
