

Pooria Hamidi Appeals To Trump: ईरान के एक युवक पूरिया हमीदी ने सोशल मीडिया पर अपना अंतिम वीडियो पोस्ट करने के बाद मौत को गले लगा लिया है। 10 मिनट से अधिक लंबे इस वीडियो में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर हमला करने की अपील की। हमीदी का कहना था कि वे अब ईरानी शासन के जुल्मों को और बर्दाश्त नहीं कर सकते और उन्हें बाहरी मदद चाहिए। उनका यह वीडियो अब पूरी दुनिया में वायरल हो रहा है और ईरान के भीतर के गंभीर हालातों को बयां कर रहा है।
ईरान के दक्षिणी बंदरगाह शहर बुशहर के रहने वाले पूरिया हमीदी ने अपना यह वीडियो यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया था। वीडियो की शुरुआत में ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि जब लोग इसे देखेंगे तब तक वे दुनिया छोड़ चुके होंगे। उन्होंने अपने देश की आजादी के लिए अपनी जान का बलिदान देने की बात कही और ट्रंप से मदद मांगी।
हमीदी ने ट्रंप से आग्रह किया कि वे तेहरान के धार्मिक शासन के साथ किसी भी प्रकार का कूटनीतिक समझौता न करें। उनका मानना था कि कोई भी नई डील उन 40,000 लोगों के साथ बड़ा धोखा होगी जिन्होंने आजादी के लिए जान दी। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता अब इस जुल्म के खिलाफ अकेले लड़ने में खुद को पूरी तरह असमर्थ महसूस कर रही है।
वीडियो में हमीदी ने सीधे तौर पर ट्रंप को संबोधित करते हुए कहा कि हमने आपकी बातों पर भरोसा किया और विरोध किया। उन्होंने बताया कि बिना विदेशी सेना के दखल के निहत्थे लोग हथियारों से लैस सरकारी सुरक्षाबलों का मुकाबला नहीं कर सकते। हमीदी ने अमेरिका से ईरान पर सैन्य कार्रवाई की विनती करते हुए इसे देश को बचाने की अंतिम उम्मीद बताया।
युवक ने ईरान से निर्वासित नेता रजा पहलवी के प्रति अपना पूरा समर्थन जताते हुए उन्हें बेहतर विकल्प बताया। उनका मानना था कि पहलवी एक अंतरिम सरकार बनाकर देश को इस राजनीतिक और सामाजिक संकट से बाहर निकाल सकते हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि देश में भविष्य न देख पाना किसी भी इंसान को बहुत ज्यादा हताश कर देता है।
हमीदी ने दावा किया कि ईरान में रूस-यूक्रेन या इजरायल-फिलिस्तीन जंग से भी अधिक संख्या में निर्दोष लोग मारे गए हैं। उन्होंने बताया कि वहां के लोग अब सो नहीं पा रहे हैं और न ही ठीक से अपनी भावनाओं को व्यक्त कर पा रहे हैं। वीडियो के अंत में उन्होंने अपने देशवासियों से एक-दूसरे का साथ देने और हमेशा एकजुट रहने की मार्मिक अपील की।
हमीदी की यह मौत उस समय हुई है जब ईरान में विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने अपनी कार्रवाई बहुत तेज कर दी है। हजारों लोगों को जेलों में डाल दिया गया है और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं की सजा को लगातार बढ़ाया जा रहा है। इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान में चल रहा यह संघर्ष अब एक बहुत ही हिंसक और अनिश्चित दौर में प्रवेश कर चुका है।