जापान की सीमा के पास रूसी न्यूक्लियर प्लेन, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Russia Nuclear Planes Near Japan: यूक्रेन के साथ चल रहे भीषण युद्ध के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अब पूर्वी मोर्चे पर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर दुनिया को चौंका दिया है। रूस और जापान के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया, जब रूसी वायुसेना के 10 बमवर्षक विमानों ने जापान सागर के ऊपर लगातार 11 घंटों तक उड़ान भरी। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जापान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन विमानों में 3 विमान परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम न्यूक्लियर बमवर्षक थे।
जापान द्वारा साझा किए गए मैप और डेटा के अनुसार, ये रूसी विमान जापान के जमीनी इलाके से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर उड़ रहे थे। रूस ने इस मिशन के लिए विमानों को तीन समूहों में विभाजित किया था।
इनमें Tu-95MS सामरिक मिसाइल वाहक, Su-35S और Su-30SM जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू जेट शामिल थे। जापान ने इस कार्रवाई को ‘उकसाने वाली’ बताया है, जबकि रूस के रक्षा मंत्रालय ने इसे एक ‘नियोजित और सफल मिशन’ करार दिया है।
Two Tu-95MS strategic missile carriers escorted by Su-35S and Su-30SM fighter jets performed a scheduled flight over the waters of the Sea of Japan. The duration of the flight was more than 11 hours.
📹MoD RF (Jan. 21)https://t.co/a4yzY20fKp pic.twitter.com/i2czmECxTC — Massimo Frantarelli (@MrFrantarelli) January 21, 2026
रूस और जापान के बीच यह तनाव नया नहीं है। दोनों देशों के बीच कुरिल द्वीपसमूह के चार द्वीपों को लेकर दशकों पुराना विवाद है। जापान का दावा है कि इन द्वीपों पर रूस ने जबरन कब्जा कर रखा है और वे जापान के अभिन्न अंग हैं। ये द्वीप रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं जो जापान के होक्काइडो के उत्तर-पूर्व और रूस के कामचटका प्रायद्वीप के दक्षिण में स्थित हैं। हाल के वर्षों में जापान की बढ़ती सक्रियता से मॉस्को काफी नाराज चल रहा है।
जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि रूस का यह शक्ति प्रदर्शन न केवल जापान के लिए बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती पैदा करता है।
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गौरतलब है कि एशिया में जापान को अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी माना जाता है और 1945 के द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से ही जापान की बाहरी सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका के पास है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की इस हरकत के बाद टोक्यो जल्द ही सुरक्षा मसलों पर अमेरिका से संपर्क साध सकता है। साथ ही, रूस और चीन की बढ़ती नजदीकी भी इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रही है।