भास्कर और अरुण सवानी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Organized Crime And Healthcare Fraud: अमेरिका में बसे भारतीय मूल के सवानी बंधुओं ने सफलता की आड़ में जो काला साम्राज्य खड़ा किया, उसका अब पर्दाफाश हो गया है। पेन्सिलवेनिया में रहने वाले भास्कर और अरुण सवानी को संगठित अपराध और कई तरह के फर्जीवाड़ों में दोषी पाया गया है। संगठित अपराध और स्वास्थ्य सेवा धोखाधड़ी के इस मामले ने अमेरिकी न्याय विभाग को भी हिलाकर रख दिया है क्योंकि यह जाल कई राज्यों तक फैला हुआ था। सवानी ग्रुप के जरिए इन भाइयों ने न केवल कानून की धज्जियां उड़ाईं बल्कि आम मरीजों की सेहत के साथ भी खिलवाड़ किया।
सवानी बंधुओं ने मुख्य रूप से ‘मेडिकेड’ और ‘हेल्थकेयर’ सेक्टर को अपना निशाना बनाया और अमेरिकी सरकार को करीब 30 मिलियन डॉलर का बड़ा चूना लगाया। जब उनके डेंटल क्लीनिकों के इंश्योरेंस कॉन्ट्रैक्ट रद्द हुए, तो उन्होंने ‘डमी’ व्यापार मालिकों के नाम पर फिर से नए कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर लिए। इतना ही नहीं, उन्होंने उन डॉक्टरों के नाम पर फर्जी बिल भेजे जो उस वक्त इलाज के समय अमेरिका में मौजूद ही नहीं थे। इस पूरे अवैध पैसे को छिपाने के लिए उन्होंने बैंक खातों और मुखौटा कंपनियों का एक बेहद पेचीदा जाल बुना था।
हैरानी की बात यह है कि इन्होंने मरीजों के शरीर में ऐसे डेंटल इंप्लांट्स लगाए जो इंसानों के उपयोग के लिए मान्य ही नहीं थे। बिना किसी सहमति के किए गए इस कृत्य ने स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति लोगों के विश्वास को पूरी तरह तोड़ा है।
सवानी बंधुओं ने H-1B वीजा प्रणाली का भी जमकर दुरुपयोग किया और फर्जी कागजात के आधार पर भारतीय कामगारों को अमेरिका बुलाया। इन कर्मचारियों को पूरी तरह से खुद पर निर्भर बनाकर उनसे अवैध रूप से मोटी फीस वसूली जाती थी जो सरासर गैर-कानूनी है।टैक्स चोरी के मामले में भी ये पीछे नहीं रहे और 1.6 मिलियन डॉलर की व्यक्तिगत आय को सरकारी दस्तावेजों में कभी उजागर ही नहीं किया। उन्होंने अपने निजी घर के स्विमिंग पूल और बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी अपनी कंपनी के खाते में डाल दिया।
भास्कर सवानी को अधिकतम 420 साल और अरुण को 415 साल तक की सजा सुनाई जा सकती है जिसका फैसला जुलाई 2026 में होगा। उनकी एक सहयोगी एलेक्जेंड्रा को भी इस मामले में 40 साल की कड़ी कैद की सजा का सामना करना पड़ेगा।
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इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प मोड़ यह है कि सवानी बंधु FBI डायरेक्टर काश पटेल के साथ अपनी नजदीकी दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे। वे सोशल मीडिया पर काश पटेल के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट करके प्रशासन में अपनी उंची पहुंच का दिखावा करते थे। हैरानी की बात यह है कि जिस वक्त वे काश पटेल के साथ जश्न मना रहे थे, उसी समय वे खुद FBI की रडार पर थे। साल 2023 में ही उन पर गंभीर आरोप तय हो चुके थे लेकिन वे फिर भी खुद को कानून से ऊपर समझते रहे।
अब जब कानून का शिकंजा कस चुका है, तो उनकी ये तस्वीरें और शेखी बघारना केवल एक कड़वी याद बनकर रह गया है। यह मामला विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि गलत रास्ते का अंजाम हमेशा बुरा ही होता है।