रियाद में 12 देशों की महाबैठक! ईरान को दी आखिरी चेतावनी, ‘आत्मरक्षा’ के नाम पर होगा बड़ा पलटवार?
Riyadh Meeting: सऊदी अरब में जुटे 12 अरब और मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की और UN चार्टर के तहत 'आत्मरक्षा' के अधिकार का दावा करते हुए जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए।
- Written By: अमन उपाध्याय
सऊदी अरब के रियाद में क्षेत्रीय सुरक्षा पर एक बैठक के दौरान अरब और इस्लामी देशों के मंत्रियों की फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Riyadh Meeting Arab Muslim Ministers Iran War: मध्य पूर्व में जारी विनाशकारी युद्ध अब अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच, सऊदी अरब की राजधानी रियाद में बुधवार को 12 अरब और मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों की एक आपातकालीन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ईरान की ओर से पड़ोसी देशों के ऊर्जा केंद्रों और बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे लगातार हमलों के खिलाफ एक साझा रणनीति तैयार करना था।
इन 12 देशों ने बनाया साझा मोर्चा
गुरुवार को जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार, इस महत्वपूर्ण बैठक में सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, लेबनान, पाकिस्तान, तुर्की, सीरिया और अज़रबैजान के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। ये सभी देश किसी न किसी रूप में इस युद्ध की आग से प्रभावित हो रहे हैं, चाहे वह सीधे तौर पर ईरान के मिसाइल हमले हों, गिरता हुआ मलबा हो या ऊर्जा आपूर्ति में आती भारी कमी।
ईरानी हमलों की कड़ी निंदा
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण फैसला यह रहा कि इन 12 देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए ‘आत्मरक्षा के अधिकार’ की घोषणा की है। मंत्रियों ने ईरान द्वारा आवासीय क्षेत्रों, जल अलवणीकरण संयंत्रों, तेल सुविधाओं और हवाई अड्डों पर किए गए ‘जानबूझकर’ किए गए बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की।
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सऊदी अरब की चेतावनी
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने बैठक के बाद बेहद सख्त लहजे में ईरान को आगाह किया। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के पास ईरान को रोकने के लिए ‘अत्यधिक क्षमताएं’ हैं और वे जरूरत पड़ने पर इनका उपयोग करने से नहीं हिचकिचाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ वर्षों की कोशिशों के बाद बना ‘भरोसा’ अब पूरी तरह टूट चुका है और संबंधों को सामान्य होने में लंबा समय लगेगा।
इजरायल और लेबनान पर भी कड़ा रुख
जहां एक तरफ ईरान को घेरा गया, वहीं दूसरी तरफ इन देशों ने लेबनान पर इजरायल के हमलों और उसकी विस्तारवादी नीतियों की भी निंदा की। लेबनान में इजरायली हमलों के कारण अब तक लगभग 968 लोगों की जान जा चुकी है।
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दूसरी ओर, ईरान में नेतृत्व परिवर्तन के बाद तेहरान का रुख और भी आक्रामक नजर आ रहा है। नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत तेल सुविधाओं को निशाना बनाने की बात स्वीकार की है। ईरान का कहना है कि वह अपने बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए युद्ध के एक ‘नए चरण’ में प्रवेश कर चुका है।
