CDS की कॉपी या सत्ता पर कब्जा? पाकिस्तान ने लाया नया कानून, मुनीर बने रहेंगे जीवनभर फील्ड मार्शल

Pakistan Defense Amendment: पाकिस्तान की शाहबाज शरीफ सरकार ने संसद में एक अहम संशोधन विधेयक पेश किया है, जिसमें मौजूदा आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर को ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ (CDF) बनाने की योजना है।
"Munir, clean up the mess with the army," Pak MP says after former ISI chief's sentencing, sparking uproar
असीम मुनीर, पाकिस्तान के आर्मी चीफ, फोटो ( सो. सोशल मीडिया)
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Pakistan Army Chief to be appointed CDF:  पाकिस्तान की राजनीति और सेना के बीच शक्ति-संतुलन को लेकर एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की सरकार ने संसद में एक संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया है, जिसके तहत मौजूदा सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को एक नई और शक्तिशाली पदवी  चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) दी जाएगी।

इस विधेयक का सबसे बड़ा पहलू यह है कि यह भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और भारत की सीडीएस (Chief of Defence Staff) प्रणाली से प्रेरित बताया जा रहा है। पाकिस्तान की सरकार का दावा है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के एकीकरण के लिए है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह सेना को और ज्यादा राजनीतिक शक्ति देने का रास्ता है।

क्या है संशोधन विधेयक का मुख्य प्रावधान?

पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 243 में संशोधन प्रस्तावित है, जिससे सेना प्रमुख की भूमिका को और ऊंचा किया जा सके। संशोधन के बाद मौजूदा आर्मी चीफ को ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ (CDF) का अतिरिक्त दर्जा मिलेगा। इसका अर्थ है कि पाकिस्तानी सेना, नौसेना और वायुसेना  तीनों का सर्वोच्च नियंत्रण अब एक ही पद पर केंद्रित होगा। यह बिल्कुल भारत के सीडीएस मॉडल जैसा ढांचा होगा।

क्या होंगी सीडीएफ की शक्तियां?

इस पद के तहत, सीडीएफ को रक्षा नीतियों, तीनों सेनाओं के समन्वय और रणनीतिक निर्णयों पर अंतिम अधिकार प्राप्त होगा। साथ ही, सरकार की रक्षा समिति और सुरक्षा परिषद में भी उनकी निर्णायक भूमिका रहेगी। इससे प्रधानमंत्री की सैन्य मामलों में निर्भरता और बढ़ जाएगी।

असीम मुनीर को ‘जीवनभर फील्ड मार्शल’ का दर्जा

सबसे चौंकाने वाला बिंदु यह है कि विधेयक में फील्ड मार्शल की उपाधि को जीवनभर कायम रखने का भी प्रावधान है। इसका मतलब है कि जनरल असीम मुनीर जीवनभर फील्ड मार्शल बने रहेंगे। वे हमेशा वर्दी पहन सकेंगे और उन्हें केवल महाभियोग के माध्यम से ही हटाया जा सकेगा। साथ ही, उन्हें कानूनी प्रतिरक्षा (legal immunity) भी प्राप्त होगी।

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