यूक्रेन की लड़ाई NATO पर आई, नॉर्वे ने तैनात किए खतरनाक फाइटर जेट, रूस भी तैयार

रूस-यूक्रेन युद्ध में नया मोड़ आया है, क्योंकि पोलैंड भी सक्रिय हो गया है। नॉर्वे ने अपने एफ-35 फाइटर जेट्स पोलैंड में तैनात किए हैं, जिससे युद्ध के व्यापक होने की आशंका बढ़ गई है।
यूक्रेन की लड़ाई NATO पर आई, नॉर्वे ने तैनात किए खतरनाक फाइटर जेट, रूस भी तैयार
नॉर्वे ने पोलैंड में तैनात किया F-35 फाइटर जेट (फोटो- सोशल मीडिया)
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वारसॉ: रूस-यूक्रेन युद्ध में अब एक नया मोड़ आ गया है, क्योंकि अब पोलैंड भी सक्रिय रूप से इसमें शामिल होता दिख रहा है। पोलैंड को आशंका है कि यूक्रेन के बाद रूस उस पर भी हमला कर सकता है। इसी खतरे को देखते हुए नॉर्वे ने अपने सबसे खतरनाक फाइटर जेट्स एफ-35 को पोलैंड में तैनात करने का फैसला लिया है।

पोलैंड नाटो गठबंधन का सदस्य है, और अगर रूस उस पर हमला करता है, तो इसे पूरे नाटो पर हमला माना जाएगा। ऐसे में जंग और भी व्यापक हो सकती है। नॉर्वे ने कहा है कि एफ-35 जेट्स की तैनाती यूक्रेन को समर्थन देने और रेज्जो-यासेनका एयरपोर्ट की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मकसद से की जा रही है। इस कदम के बाद यह आशंका और गहराई है कि अगर रूस ने पोलैंड को निशाना बनाया, तो यह युद्ध और बड़े स्तर पर फैल सकता है।

नॉर्वे ने दी सफाई

एफ-35 जेट्स की तैनाती को लेकर नॉर्वे के रक्षा मंत्री टोरे ओ सैंडविक ने कहा कि वे पोलैंड और यूक्रेन की मदद करने की मंशा से यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, नॉर्वे ने यूक्रेन और पोलैंड के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एफ-35 लड़ाकू विमानों की तैनाती का निर्णय लिया है।

सैंडविक ने कहा कि हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यूक्रेन को हर संभव सहायता मिलती रहे और वह अपने संघर्ष को जारी रख सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम मुख्य रूप से यूक्रेन और पोलैंड की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। इसके साथ ही यह निर्णय नाटो के प्रति नॉर्वे की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

अमेरिका कर रहा नॉर्वे मदद

जानकारी के मुताबिक, दिसंबर 2024 से पोलैंड के रेज्जो-यासेनका एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए नॉर्वे का NASAMS एयर डिफेंस सिस्टम तैनात था। अप्रैल 2025 के अंत तक नॉर्वे को अमेरिका से ऑर्डर किए गए सभी 52 एफ-35 लड़ाकू विमान प्राप्त हो गए। हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम सहित नाटो सहयोगियों ने पोलैंड के हवाई क्षेत्र की निगरानी के लिए अमेरिकी वायु सेना के एफ-22 रैप्टर और रॉयल एयर फोर्स के टाइफून जेट्स का उपयोग किया।

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