मौलाना फजलुर रहमान, मौलाना फजलुर रहमान
Maulana Fazlur Rahman in Bangladesh: पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्तों में हाल के वर्षों में आई नरमी एक बार फिर चर्चा में है। पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान के कई सैन्य अधिकारियों ने बांग्लादेश का दौरा किया और अब पाकिस्तान के विवादित धार्मिक नेता तथा जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान भी ढाका पहुंच गए हैं। उनका यह दौरा धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन इसके राजनीतिक संकेत भी कम नहीं हैं।
मौलाना फजलुर रहमान, जिन्हें पाकिस्तान की राजनीति में एक प्रभावशाली लेकिन विवादास्पद चेहरा माना जाता है, बांग्लादेश में कई बड़े धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। ढाका के सुहरावर्दी एवेन्यू पर आयोजित होने वाले एक विशाल जलसे में वे मुख्य वक्ता होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, वे अपने संबोधन में अहमदियों को गैर-मुस्लिम घोषित करने की मांग को आगे बढ़ाएंगे और इस्लाम के कथित दुश्मनों के खिलाफ जिहाद के लिए समर्थन जुटाने की भी अपील करेंगे।
मौलाना रहमान ने बताया कि उनकी यात्रा का उद्देश्य धार्मिक और चिंतनशील कार्यक्रमों में भाग लेना है। वे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक सम्मेलनों, मदरसा सभाओं और धार्मिक संस्थानों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे। उनके साथ JUI-F के कुछ वरिष्ठ नेता भी मौजूद हैं, जो धार्मिक-राजनीतिक नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, रहमान ढाका और चटगांव में आयोजित कई धार्मिक आयोजनों में भाग ले रहे हैं। उनका उद्देश्य पाकिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना बताया जा रहा है। इस दौरान वे बांग्लादेश के प्रमुख इस्लामी विद्वानों, संगठनों और मदरसों के प्रमुखों से मुलाकात कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के धार्मिक ढांचे में एक नए संवाद की संभावना बन रही है।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौलाना रहमान का यह दौरा सिर्फ धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। दक्षिण एशिया में इस्लामी राजनीतिक नेटवर्क को मजबूत करना और अपनी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक साख बढ़ाना भी इस यात्रा का एक अहम हिस्सा है। बांग्लादेश जैसे देश में, जहां धार्मिक राजनीति पर कड़ी निगरानी रहती है, मौलाना की मौजूदगी को प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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जानकारों का कहना है कि यह दौरा न सिर्फ धार्मिक संवाद का अवसर है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि दक्षिण एशिया के धार्मिक संगठनों के बीच पुरानी साझेदारियों को नए सिरे से मजबूत किया जा रहा है। पाकिस्तान-बांग्लादेश संबंधों में जहां राजनीतिक दूरी अक्सर देखी जाती है, वहीं इस तरह के धार्मिक संपर्क एक नई दिशा की शुरुआत भी साबित हो सकते हैं।