
बंगाल हिंसा की एक तस्वीर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Awami League Lockdown: बांग्लादेश की राजधानी ढाका इन दिनों राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रही है। गुरुवार को अवामी लीग द्वारा घोषित ढाका लॉकडाउन से पहले ही शहर में तनाव बढ़ गया है। बुधवार शाम धोलाईपार इलाके में उपद्रवियों ने एक यात्री बस में आग लगा दी, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
यह घटना शाम करीब 6:30 बजे की बताई जा रही है। ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, आगजनी की सूचना मिलते ही अग्निशमन सेवा की दो टीमें मौके पर पहुंचीं और 6:40 बजे तक आग पर काबू पा लिया। अग्निशमन सेवा की ड्यूटी ऑफिसर खालिदा यास्मीन ने पुष्टि की कि आग की सूचना शाम 6:18 बजे मिली थी। सौभाग्य से इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
पुलिस ने दावा किया है कि राजधानी की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) कमिश्नर शेख मोहम्मद सज्जात अली ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि 13 नवंबर को चिंता की कोई बात नहीं है कानून व्यवस्था नियंत्रण में है। लेकिन घटनाएं प्रशासन के दावों की पोल खोलती दिख रही हैं।
दरअसल, पिछले तीन दिनों से बांग्लादेश के कई शहरों में सिलसिलेवार धमाके और आगजनी की घटनाएं हो रही हैं। सोमवार को ढाका में 17 बम फेंके गए जबकि बुधवार तक देशभर में 10 से अधिक वाहनों को आग लगा दी गई।
पहला विस्फोट सोमवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 3:45 बजे हुआ, जब ग्रामीण बैंक मुख्यालय के पास धमाका हुआ। यह वही बैंक है जिसकी स्थापना अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस ने शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद की थी। कुछ ही घंटों बाद मत्स्य पालन और पशुधन सलाहकार फरीदा अख्तर के व्यावसायिक प्रतिष्ठान पर देसी बम से हमला किया गया।
मंगलवार रात को भी हमलावरों ने एक स्कूल पर पेट्रोल बम से हमला किया। पुलिस का कहना है कि ये सभी हमले गुरुवार को प्रस्तावित लॉकडाउन से पहले माहौल में डर और दहशत फैलाने की कोशिश हैं। ढाका और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है, जबकि प्रशासन ने पूरे देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
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बांग्लादेश पिछले एक साल से राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद शुरू हुए सियासी संकट ने अब फिर से हिंसक रूप ले लिया है। राजधानी ढाका और अन्य शहरों में लगातार हो रही बम धमाके और आगजनी से हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। लोगों में डर का माहौल है और आम नागरिक घरों में सिमटने को मजबूर हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय बांग्लादेश की स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है।






