रूसी तेल पर ट्रंप के दावे से मची खलबली, पुतिन के ऑफिस ने दिया दो-टूक जवाब, कहा- हमें नहीं मिली कोई खबर
Russian Oil India News: डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर क्रेमलिन की पहली प्रतिक्रिया आई है जिसमें कहा गया था कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद कर देगा। रूस ने कहा कि भारत से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है।
- Written By: अमन उपाध्याय
मोदी और पुतिन, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
India Russia Strategic Partnership: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई फोन कॉल के बाद ‘रूसी तेल’ को लेकर शुरू हुआ विवाद गहराता जा रहा है। ट्रंप ने दावा किया था कि वॉशिंगटन के साथ एक ऐतिहासिक ट्रेड डील होने के बाद भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। हालांकि, अब इस दावे पर रूस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसने ट्रंप के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
क्रेमलिन का स्पष्ट इनकार
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि उन्हें नई दिल्ली की ओर से तेल व्यापार बंद करने जैसा कोई संकेत या बयान नहीं मिला है। पेस्कोव ने मॉस्को में मीडिया से बात करते हुए कहा कि अब तक हमें इस मामले पर नई दिल्ली से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रूस और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी बहुत मजबूत है और रूस इसे और अधिक विकसित करने का इरादा रखता है।
ट्रंप का ‘तेल’ वाला दावा
दरअसल, सोमवार को पीएम मोदी से बातचीत के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा व्यापारिक समझौता हुआ है। इस डील के तहत अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। ट्रंप ने इसी संदर्भ में कहा कि पीएम मोदी रूसी तेल की खरीद रोकने पर सहमत हुए हैं और इसके विकल्प के रूप में भारत अब अमेरिका और संभवतः वेनेज़ुएला से अधिक तेल खरीदने पर विचार करेगा।
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भारत की चुप्पी और रूस का रुख
दिलचस्प बात यह है कि भारत सरकार ने इस ‘ट्रेड डील’ और टैरिफ में कमी वाले हिस्से की तो पुष्टि की है लेकिन रूसी तेल के आयात को रोकने के मुद्दे पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। दूसरी ओर, क्रेमलिन ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि वे अमेरिका-भारत के द्विपक्षीय संबंधों का सम्मान करते हैं लेकिन रूस के लिए भारत के साथ उसकी अपनी ‘उन्नत रणनीतिक साझेदारी’ सबसे महत्वपूर्ण है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह दावा रूस पर दबाव बनाने की कूटनीति का हिस्सा हो सकता है लेकिन बिना भारत की आधिकारिक पुष्टि के इसे हकीकत मानना जल्दबाजी होगी। फिलहाल, मॉस्को इस मामले में नई दिल्ली के साथ अपने व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को पहले की तरह ही मजबूत बनाए रखने की बात कर रहा है।
