बौखला गया सनकी तानाशाह, विध्वंसक पोत के क्षतिग्रस्त पर 3 अधिकारियों को देगा दर्दनाक सजा!

उत्तर कोरिया में एक युद्धपोत के प्रक्षेपण के दौरान हुए हादसे के बाद किम जोंग उन काफी नाराज हैं। सरकारी मीडिया के अनुसार, इस घटना के चलते तीन अधिकारियों को हिरासत में लिया गया है।
बौखला गया सनकी तानाशाह, विध्वंसक पोत के क्षतिग्रस्त पर 3 अधिकारियों को देगा दर्दनाक सजा!
बौखला गए किम जोंग उन, फोटो ( सो. सोशल मीडिया )
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प्योंगयांग: उत्तर कोरिया में पिछले सप्ताह नौसेना के लिए बेहद अहम माने जा रहे 5,000 टन वजनी विध्वंसक युद्धपोत के लॉन्च के दौरान हुई दुर्घटना के बाद तानाशाह किम जोंग उन का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ी सजा देने के आदेश दिए हैं। किम जोंग उन के निर्देश के बाद शिपयार्ड से जुड़े तीन वरिष्ठ अधिकारियों को हिरासत में ले लिया गया है।

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी ‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी’ (KCNA) ने बताया कि यह घटना उस समय हुई जब जलावतरण समारोह के दौरान पोत क्षतिग्रस्त हो गया। इस समारोह में खुद किम जोंग उन भी मौजूद थे।

किम का गुस्सा सातवें आसमान पर

उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों में देखा गया है कि युद्धपोत एक ओर झुका हुआ है और नीले कपड़े से ढका हुआ है। इसके कुछ हिस्से पानी में डूबे हुए नजर आ रहे हैं। यह युद्धपोत देश का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक युद्धपोत बताया गया था, जिसे परमाणु मिसाइल और अन्य आधुनिक हथियारों से लैस करने के लिए तैयार किया जा रहा था। इस घटना को "गंभीर लापरवाही" का नतीजा बताते हुए किम जोंग उन ने अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है।

इसके बाद चोंगजिन शिपयार्ड के मुख्य अभियंता, निर्माण कार्यशाला प्रमुख और प्रशासनिक मामलों के उप प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया गया है। शिपयार्ड के प्रबंधक हांग किल हो से भी पूछताछ की जा रही है।

जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई

उत्तर कोरिया की केंद्रीय सैन्य समिति ने इसे "अक्षम्य आपराधिक कृत्य" बताया है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का ऐलान किया है। हालांकि, आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पोत को गंभीर क्षति नहीं पहुंची है। अधिकारियों के मुताबिक, जहाज के निचले हिस्से में कुछ मामूली खरोंचें आई हैं, और उसमें थोड़ा समुद्री पानी भर गया था।

इसे निकालने और मरम्मत का काम करने में लगभग 10 दिन का समय लगेगा। यह घटना उत्तर कोरिया के लिए कूटनीतिक और सैन्य दृष्टि से एक झटका मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब किम जोंग उन अमेरिकी सैन्य दबावों का सामना करते हुए अपनी नौसेना को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

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