जब तक मैं धर्माचार्य हूं...UGC पर रामभद्राचार्य का बड़ा बयान, सोशल मीडिया पर छिड़ गया नया घमासान; देखें- VIDEO

Uttar Pradesh News: जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने UGC के नए नियमों को लेकर बस्ती में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा है कि अगर हमें सिविल वॉर से बचना है, तो सरकार को UGC रेगुलेशन वापस लेने होंगे।
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Rambhadracharya on UGC: जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने UGC के नए नियमों को लेकर बस्ती में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा है कि अगर हमें सिविल वॉर से बचना है, तो सरकार को UGC रेगुलेशन वापस लेने होंगे। उनके रहते यह कानून लागू नहीं होगा। उनके इस बयान का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बस्ती के कप्तानगंज ब्लॉक के बढ़नी में रामायण सुनाते हुए रामभद्राचार्य ने केंद्र सरकार पर हमला बोला और UGC की नई गाइडलाइंस की जरूरत पर सवाल उठाया। साथ सरकार को चेतावनी देते हुए रामभद्राचार्य ने कहा कि जब तक मैं धर्मगुरु हूं तब तक किसी को भी अपनी मनमानी करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

सामने आया बयान का वीडियो

रामभद्राचार्य ने अपने बयान में कहा कि यह कानून एक न एक दिन वापस होना है। सरकार नहीं वापस लेगी तो सर्वोच्च न्यायालय ही वापस लेगा। इसके आगे उन्होंने यह भी कहा कि जब तक मैं धर्माचार्य हूं तब तक किसी को अपने मन की नहीं करने दी जाएगी। इस बयान का वीडियो भी सामने आया है।

रामभद्राचार्य के इस बयान से सोशल मीडिया पर नया तूफान उठ खड़ा हुआ है। एक धड़ा बयान का वीडियो शेयर करते हुए यूजीसी नियमों को एकता के खिलाफ बता रहा है, तो दूसरा धड़ा रामभद्राचार्य के इस बयान का मुखर विरोध कर रहा है।

और क्या कुछ बोले रामभद्राचार्य?

उन्होंने कहा कि समाज में भेदभाव क्यों हो रहा है? समाज में बंटवारा मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण कभी जातिवादी नहीं रहे। दुर्भाग्य से कई ब्राह्मणों ने मांस, मछली और शराब खाना शुरू कर दिया है। ऐसे ब्राह्मणों को खुद जागरूक होना चाहिए। महर्षि वशिष्ठ की कहानी सुनाते हुए रामभद्राचार्य ने कहा कि गुरु वशिष्ठ निषाद राजा का सम्मान करते थे। अगर द्रोणाचार्य ने कर्ण को पढ़ाने से मना नहीं किया होता तो महाभारत नहीं होता।

महर्षि वशिष्ठ का दिया उदाहरण

स्वामी रामभद्राचार्य ने गुरु वशिष्ठ को महान ऋषि बताया जिन्होंने भगवान राम और उनके भाइयों को वेद, शास्त्र और शाही काम सिखाए। तीसरे दिन कहानी जारी रखते हुए स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि बचपन में श्री राम और उनके भाई शिक्षा लेने शाही काम सीखने और अवध के भविष्य के आदर्श राजा बनने के लिए ट्रेनिंग लेने के लिए ऋषि वशिष्ठ के आश्रम गए थे।

वनवास के बाद भी राम अपने किसी भी शक, उलझन या समस्या को सुलझाने के लिए वशिष्ठ के लगातार संपर्क में रहे। इसके अलावा महाराजा दशरथ अपने बेटों को पढ़ाने के लिए इस गुरुकुल में वशिष्ठ से मिलने गए और उनसे पढ़ाने का अनुरोध किया। पूरा पंडाल एक साथ 'भए प्रगट कृपाला, दीन दयाला कौशल्या हितकारी' गीत गा रहा था।

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