जापान में रेल हादसा, फोटो (सो. एआई डिजाइन)
Japan News In Hindi: जापान के साइतामा प्रांत के शिराओका शहर में गुरुवार को एक रेल क्रॉसिंग पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब जेआर उत्सुनोमिया लाइन पर चल रही एक ट्रेन की टक्कर एक कार से हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और ट्रेन के कुछ डिब्बे पटरी से उतर गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि ट्रेन में सवार किसी भी यात्री को चोट नहीं आई।
प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा स्थानीय समयानुसार दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर हुआ। पुलिस और अग्निशमन विभाग को तुरंत मौके पर बुलाया गया। कार में फंसे एक व्यक्ति को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, जो काफी देर तक चला। हादसे के कारण आसपास के इलाके में यातायात प्रभावित रहा।
ट्रेन चालक ने अधिकारियों को बताया कि टक्कर के बाद ट्रेन के डिरेल होने की आशंका जताई गई थी जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में रेल क्रॉसिंग पर लगे बैरियर और सिग्नल सिस्टम की भूमिका पर सवाल उठे हैं। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि कार क्रॉसिंग पर कैसे पहुंची और क्या किसी तकनीकी खामी के कारण हादसा हुआ।
इस घटना के चलते शोनान-शिनजुकु लाइन पर शिनजुकु स्टेशन से उत्सुनोमिया स्टेशन तक अप और डाउन दोनों दिशाओं में ट्रेन सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गईं। कई यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा हालांकि रेलवे प्रशासन ने जल्द से जल्द सेवाएं बहाल करने का भरोसा दिया।
गौरतलब है कि पिछले महीने भी जापान में रेल सेवाएं एक अजीब वजह से सुर्खियों में आई थीं। नॉर्थ-ईस्ट जापान में तोहोकू शिंकानसेन लाइन पर ट्रैक पर एक हंस दिखाई देने के बाद बुलेट ट्रेन सेवा को कुछ समय के लिए रोक दिया गया था। रेलवे ऑपरेटर जेआर ईस्ट के अनुसार, इस घटना से करीब 1,300 यात्री प्रभावित हुए थे, हालांकि लगभग 40 मिनट बाद सेवाएं सामान्य कर दी गई थीं।
जापान के हाई-स्पीड रेल ऑपरेटर के अनुसार, शिंकानसेन ट्रेन अधिकतम 177 मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है। अगर इसी ट्रेन से न्यूयॉर्क से सीधे लॉस एंजिल्स तक की यात्रा की जाए तो यह सफर महज 14 घंटे में पूरा हो सकता है। इतनी तेज़ गति हासिल करने के लिए इंजीनियरों ने कई आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया।
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ट्रेन को खास एयरोडायनामिक आकार दिया गया, जापान के पहाड़ी भूभाग को ध्यान में रखते हुए कम घुमाव वाला ट्रैक विकसित किया गया और अत्याधुनिक ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल सिस्टम लगाया गया जो सुरक्षा के साथ ट्रेनों को उनकी सर्वोाधिक संभव रफ्तार पर संचालित करता है।