
एस जयशंकर ने रूस के उप PM से की मुलाकात, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
India Russia Relations: भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस की राजधानी मॉस्को पहुंचे, जहां उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और शीर्ष रूसी नेतृत्व से विस्तृत बातचीत की।
यह दौरा उस समय हो रहा है जब अगले महीने भारत में 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है। दोनों देशों के बीच यह वार्षिक शिखर बैठक 2000 से लगातार चली आ रही है और द्विपक्षीय संबंधों की नींव मानी जाती है।
मॉस्को पहुंचने के बाद जयशंकर ने सबसे पहले रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आर्थिक, तकनीकी, व्यापारिक और रक्षा सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि अगस्त 2025 में 26वें आईआरआईजीसी-टीईसी बैठक के बाद से हुई प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले वार्षिक भारत-रूस समिट की तैयारियों को अंतिम रूप देने पर जोर दिया गया।
A pleasure to meet First DPM Denis Manturov in Moscow today morning. Took stock of the progress made since our last meeting for the 26th IRIGC-TEC in August 2025. Reviewed preparations for the upcoming Annual India-Russia Leaders Summit in New Delhi next month. 🇮🇳 🇷🇺 pic.twitter.com/YNzdZOpTlv — Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) November 19, 2025
इसके बाद जयशंकर ने क्रेमलिन में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं पहुंचाईं और शिखर सम्मेलन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक हालात पर भी बातचीत की, जिसमें यूक्रेन संघर्ष, एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। जयशंकर ने कहा कि भारत-रूस संबंधों को आगे बढ़ाने में राष्ट्रपति पुतिन का मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है।
इस बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संकेत दिया कि वह दिसंबर में राष्ट्रपति पुतिन की मेजबानी करने के लिए उत्सुक हैं। इधर क्रेमलिन के शीर्ष अधिकारी और रूसी संघ के समुद्री बोर्ड के अध्यक्ष निकोलाई पात्रुशेव ने प्रधानमंत्री मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की।
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दिसंबर में होने वाला यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और तकनीकी क्षेत्रों में नए आयाम जोड़ सकता है। 2021 के बाद पुतिन की यह पहली भारत यात्रा होगी, ऐसे में इस दौरे के सामरिक और कूटनीतिक महत्व को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।






