इस्लामाबाद की मस्जिद में आत्मघाती धमाका, पड़ोसी देशों को दहलाने वाले पाकिस्तान को किसने दहलाया?

Islamabad Blast: इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान आत्मघाती धमाका हुआ, जिसमें करीब दो दर्जन लोगों की मौत हो गई। पूरे पाकिस्तान में इस घटना के बाद सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है।
Suicide Bomber Attacks Islamabad Shia Mosque Leaving At Least Two Dozen People Dead During Prayers
इस्लामाबाद की मस्जिद में भीषण आत्मघाती धमाका (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Terrorist Activities In Pakistan: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक बार फिर आतंकवाद का खौफनाक चेहरा सामने आया है जहां एक व्यस्त मस्जिद को निशाना बनाया गया। यहां की एक शिया मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान जोरदार धमाका हुआ जिसमें इबादत कर रहे बेगुनाह लोग मारे गए। यह हमला साबित करता है कि पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियां अब खुद उसी मुल्क की जड़ों को खोखला कर रही हैं। धमाके के बाद राजधानी के अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है और राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।

मस्जिद में तबाही

शुक्रवार की दोपहर जब करीब 700 लोग मस्जिद में जुमे की नमाज अदा कर रहे थे तभी एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि मस्जिद की इमारत को भारी नुकसान पहुंचा और चारों ओर चीख-पुकार के साथ लहूलुहान लोग मदद की गुहार लगाने लगे। इस भयावह घटना में अब तक करीब दो दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

सुरक्षा बलों की जांच

इस हमले की जिम्मेदारी फिलहाल किसी भी आतंकी संगठन ने नहीं ली है लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इसके पीछे टीटीपी का हाथ हो सकता है। पुलिस अधिकारियों ने आशंका जताई है कि घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए आने वाले समय में मृतकों का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। घटनास्थल को पूरी तरह सील कर दिया गया है और फॉरेंसिक टीमें धमाके की प्रकृति और हमलावर की पहचान करने में जुटी हुई हैं।

आतंकवाद का केंद्र

ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 के अनुसार पाकिस्तान अब दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा आतंकवाद से प्रभावित देश बन चुका है जो सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चिंता है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले एक साल में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और बलूच लिबरेशन आर्मी के हमलों में क्रमशः 90 और 60 फीसदी की भारी बढ़ोतरी हुई है। देश के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे इलाके अब आतंकी गतिविधियों के सबसे बड़े केंद्र बन चुके हैं जहां सुरक्षा बल लगातार निशाने पर हैं।

सेना को बड़ा नुकसान

आंकड़े बताते हैं कि साल 2026 के शुरुआती 40 दिनों के भीतर ही पाकिस्तानी सेना के 108 जवान विभिन्न आतंकी हमलों में अपनी जान गंवा चुके हैं। पिछले साल भी पाकिस्तानी सेना पर 1124 हमले हुए थे जिनमें लगभग तीन हजार लोगों की मौत हुई थी जो सेना की विफलता को दर्शाती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में सेना और सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा भी बढ़ रहा है क्योंकि वे आंतरिक सुरक्षा देने में नाकाम रहे हैं।

वैश्विक प्रतिबंध और हकीकत

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान में मौजूद 150 से अधिक आतंकियों को प्रतिबंधित किया है लेकिन वहां की जमीन पर अब भी आतंकी संगठन फल-फूल रहे हैं। अमेरिका का दावा है कि दुनिया के 15 सबसे खतरनाक आतंकी संगठन पाकिस्तान में सक्रिय हैं जबकि खुद पाकिस्तान भी 46 बड़े संगठनों की मौजूदगी स्वीकार करता है। जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस नीति नहीं अपनाएगा तब तक उसकी अपनी जनता इसी तरह बारूद की आग में झुलसती रहेगी।

बढ़ती अशांति का दौर

इस्लामिक स्टेट खुरासान ने भी अब पाकिस्तान के शहरी इलाकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। सिंध प्रांत में भी आतंकी हमलों में 75 फीसदी का उछाल देखा गया है जिससे यह साफ है कि अब पाकिस्तान का कोई भी कोना सुरक्षित नहीं बचा है। पाकिस्तान जिस आतंकवाद को दूसरों के खिलाफ इस्तेमाल करता था अब वही उसके अपने घर के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर सामने खड़ा हो गया है।

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