Iran Diplomacy: ईरान के भीतर चल रहे गहरे मतभेद और कट्टरपंथ अमेरिका के साथ समझौते में रुकावट

Iran Diplomacy News: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार, ईरान के आंतरिक मतभेद और कट्टरपंथियों का विभाजन अमेरिका के साथ किसी भी बड़े समझौते में सबसे बड़ी बाधा है और यह बातचीत को रोक रहा है।
Iran Diplomacy: US Secretary Of State Marco Rubio Says Internal Divisions Obstruct American Deal Now
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (सोर्स-सोशल मीडिया)
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US Iran Diplomacy Obstacles: अमेरिका-ईरान कूटनीति में बाधाओं को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को अपनी महत्वपूर्ण राय रखी है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन के साथ किसी भी तरह के समझौते में ईरान के अंदरूनी मतभेद बड़ी बाधा हैं। फॉक्स न्यूज के ट्रे यिंगस्ट को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने ईरान की वर्तमान सत्ता व्यवस्था पर बात की। ईरान पर इस समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिका की तरफ से किसी समझौते पर पहुंचने का लगातार भारी दबाव बन रहा है।

ईरान की पूरी सत्ता व्यवस्था मुख्य रूप से बहुत अधिक बंटी हुई है जिससे उनके साथ बातचीत करना मुश्किल है। उनके वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए गए वादों पर जमीनी स्तर पर पूरी तरह से अमल करना भी काफी सीमित हो जाता है। ईरान पर मुख्य रूप से कट्टरपंथी शिया मौलवियों का राज चलता है जो कि अपने आप में एक बहुत बड़ी रुकावट है। आज के समय में ईरान का आंतरिक राजनीतिक और वैचारिक बंटवारा पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा साफ तौर पर दिखाई देता है।

कट्टरपंथियों का प्रभाव

मार्को रुबियो ने बताया कि ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व में वास्तव में कोई भी नरमपंथी या उदारवादी गुट मौजूद नहीं है। लोग अक्सर नरमपंथियों और कट्टरपंथियों की बात करते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि वहां सरकार में सभी लोग कट्टरपंथी ही हैं। इन कट्टरपंथियों में कुछ लोग व्यावहारिक रूप से देश और अर्थव्यवस्था चलाना चाहते हैं जबकि अन्य सिर्फ विचारधारा से प्रेरित हैं।

वैचारिक और व्यावहारिक तनाव

ईरान के अंदर एक तरफ वे नेता हैं जो सरकार को सुचारू रूप से चलाने की अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझते हैं। दूसरी तरफ ऐसे कई नेता मौजूद हैं जो केवल अपनी चरमपंथी धार्मिक विचारधारा के आधार पर ही पूरे देश को चलाना चाहते हैं। व्यावहारिक और वैचारिक सोच रखने वाले इन दोनों गुटों के बीच टकराव के कारण ही ईरान के अंदर लगातार भारी तनाव बना रहता है।

सत्ता के विभिन्न केंद्र

कट्टरपंथी धार्मिक विचारधारा से प्रेरित लोगों में सिर्फ आईआरजीसी के सैन्य अधिकारी ही नहीं बल्कि सर्वोच्च नेता भी पूरी तरह शामिल हैं। सर्वोच्च नेता के आस-पास मौजूद परिषद के सदस्य भी इसी चरमपंथी विचारधारा का सख्ती से पालन करते हुए अपने सभी फैसले लेते हैं। वहीं विदेश मंत्री, राष्ट्रपति और संसद के स्पीकर जैसे लोग राजनीतिक वर्ग का हिस्सा हैं जो अर्थव्यवस्था की जरूरत को भी समझते हैं।

अंतिम शक्ति किसके पास

ईरान में हमेशा ऐसे कट्टरपंथी भी होते हैं जो देश को अच्छे से चलाने और बाहरी दुनिया के साथ समझौते करने की कोशिश करते हैं। हालांकि दूसरी तरफ वे लोग होते हैं जिन्हें व्यावहारिक कूटनीति की कोई परवाह नहीं होती और उनकी सोच बहुत ज्यादा चरम होती है। रुबियो का कहना है कि ईरान में सत्ता का अंतिम झुकाव हमेशा उन्हीं कट्टर विचारधारा वाले नेताओं की तरफ ही सबसे ज्यादा होता है।

बातचीत में मुश्किलें

जिन नेताओं की सोच भविष्य को लेकर बेहद चरम है अंततः उनके ही पास देश के सभी महत्वपूर्ण फैसलों की अंतिम शक्ति होती है। यही जटिल अंदरूनी स्थिति अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत को बहुत मुश्किल बना देती है। ईरानी प्रतिनिधियों को कोई भी बड़ा अंतरराष्ट्रीय समझौता करने से पहले अपने ही सिस्टम के अंदर कई अलग-अलग लोगों से मंजूरी लेनी पड़ती है।

प्रक्रिया में देरी

अमेरिकी अधिकारियों की बातचीत सिर्फ बाहरी मंचों पर मौजूद ईरानी कूटनीतिज्ञों या उनके विदेशी प्रतिनिधियों तक ही सीमित नहीं रह सकती है। ईरानी प्रतिनिधियों को पहले अपने आंतरिक गुटों से बात करनी पड़ती है कि वे क्या मान सकते हैं और समझौते में क्या पेश कर सकते हैं। यह पूरी आंतरिक प्रक्रिया इतनी लंबी होती है कि उन्हें यह भी तय करना पड़ता है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किससे मुलाकात कर सकते हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा

विदेश मंत्री मार्को रुबियो की यह महत्वपूर्ण टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर नई रिपोर्ट्स सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों से रोक हटा ले तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खोल सकता है। हालांकि ईरान की तरफ से दिए गए इस नए प्रस्ताव में उनके विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई भी रियायत बिल्कुल शामिल नहीं है।।

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