

Pakistan Army Violence In PoK: कश्मीर में पिछले 8 हफ्तों से हालात बहुत ही खराब और तनावपूर्ण बने हुए हैं। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के रावलाकोट और मीरपुर में अधिकारों को लेकर आम जनता पिछले 50 दिनों से लगातार सड़कों पर है। इस शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना बिल्कुल जनरल डायर की तरह ही क्रूर बर्ताव कर रही है। निहत्थे नागरिकों पर सुरक्षा बलों द्वारा बिना सोचे-समझे अंधाधुंध गोलियां बरसाई जा रही हैं जो बेहद खौफनाक है।
पिछले 3 दिनों में इन इलाकों में भारी पुलिस और सैन्य बलों की तैनाती के बाद से हालात बहुत ही चिंताजनक हो गए हैं। प्रशासन की इस क्रूर कार्रवाई से पूरे इलाके में हाहाकार मच गया है और लोगों में व्यवस्था के खिलाफ भारी आक्रोश है। 48 घंटे में 30 मौतों की खबर सामने आई है, जिसने पाकिस्तानी सेना की पूरी कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके बावजूद लोग अपने अधिकारों, शांति और संसाधनों पर हक की मांग को लेकर डटे हुए हैं और पीछे नहीं हट रहे हैं।
रावलाकोट में भारी सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर एकत्र हुए थे। प्रशासन के दावों से कहीं अधिक संख्या में यहां लोग हताहत हुए हैं क्योंकि उन पर फिर से गोलीबारी की गई। मीरपुर में भी सुरक्षा बलों की इस बर्बर कार्रवाई में एक दर्जन से अधिक मासूम लोगों की जान चली गई है। सबसे दर्दनाक बात यह है कि सेना इन मृतकों के शवों को उनके परिजनों को भी नहीं सौंप रही है।
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर मानवाधिकारों के बहुत ही गंभीर और शर्मनाक उल्लंघन का सीधा आरोप लगाया है। सेना और प्रशासन मृतकों के रिश्तेदारों की सहमति के बिना ही उनके शवों को जबरन दफना रहे हैं। आरोप तो यह भी है कि कुछ लोगों के शवों को बेहद अपमानजनक तरीके से घसीटकर सेना के वाहनों में लादा गया। यह क्रूरता पाकिस्तान के अमानवीय चेहरे को पूरी दुनिया के सामने बहुत ही स्पष्ट रूप से उजागर कर रही है।
आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि पाकिस्तानी मीडिया इस पूरी हिंसा के वास्तविक आंकड़ों को जानबूझकर छिपा रहा है। वे दुनिया के सामने इस शांतिपूर्ण आंदोलन की एक बिल्कुल ही गलत और भ्रामक तस्वीर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वहां की स्थिति सरकारी दावों से बहुत ज्यादा भयावह है। सरकार वहां मीडिया पर पूरी तरह से पाबंदी लगाकर अपनी इन बड़ी नाकामियों पर पर्दा डालना चाहती है।
मीडिया ब्लैकआउट के अलावा प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर कई अन्य बहुत ही गंभीर और चिंताजनक आरोप लगाए हैं। काले कपड़ों में आए कुछ संदिग्ध लोगों ने स्थानीय दुकानों में लूटपाट और राशन की भारी चोरी को अंजाम दिया है। इन लोगों ने घरों में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की है और आम जनता के बीच खौफ का माहौल पैदा किया है। इन तमाम गंभीर आरोपों पर पाकिस्तानी अधिकारियों ने अब तक अपनी तरफ से कोई भी सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की इस सख्त और क्रूर कार्रवाई के बावजूद वहां के आंदोलनकारियों के हौसले बिल्कुल भी पस्त नहीं हुए हैं। आयोजकों का दावा है कि बुधवार को 500 से अधिक नए लोग इस विरोध प्रदर्शन और धरने में शामिल हुए हैं। उनका संकल्प बहुत मजबूत है और वे सेना की गोलियों और क्रूरता के आगे किसी भी कीमत पर नहीं झुकेंगे। लगातार बढ़ता यह जनसमर्थन पाकिस्तान सरकार के लिए एक बहुत ही बड़ी और गंभीर चुनौती बनकर सामने आ रहा है।
इन प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट रूप से कहना है कि जब तक उनकी सभी उचित मांगें पूरी नहीं हो जातीं, यह आंदोलन जारी रहेगा। वे अपने अधिकारों, इलाके में सुशासन और स्थानीय संसाधनों पर मालिकाना हक की मांग पर पूरी तरह से अडिग हैं। पाकिस्तानी सेना चाहे जितना भी जुल्म कर ले, वे अपने अधिकारों को हासिल किए बिना पीछे नहीं हटने वाले हैं। यह संघर्ष अब केवल एक विरोध नहीं बल्कि PoK के लोगों के सम्मान और जीवन की बड़ी लड़ाई बन चुका है।