

Ice Bath Benefits: फिटनेस और वेलनेस की दुनिया में बर्फीले पानी में डूबकी लगाना नया ट्रेंड बन चुका है। हीना खान जैसी सेलिब्रिटीज भी कैंसर से उबरने के बाद आइस बाथ ले रही हैं। एथलीट्स और फिटनेस इंफ्लुएंसर्स बर्फ वाले पानी में अपनी क्षमता के अनुसार समय बिताते हैं।
कहा जा रहा है कि बेहतर रिकवरी, मेंटल स्ट्रेंग्थ और स्ट्रेस मैनेजमेंट का तरीका बता रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके फायदे तभी मिलते हैं, जब इसे सही तरीके और सही व्यक्ति के निगरानी में किया जाए। उनका मानना है कि हर किसी के लिए यह सुरक्षित नहीं है।
आइस प्लंज या कोल्ड वॉटर इमर्शन में व्यक्ति कुछ मिनटों के लिए 10-15 डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान वाले पानी में बैठते है। इसका उद्देश्य शरीर को ठंडे पानी में रखकर बल्ड सर्कुलेशन को बेहतर करना है।
भारत में वेलनेस इंडस्ट्री तेजी से ग्रो कर रही है। इसी के तहत कई शहरों में आइस बाथ स्टूडियो और रिकवरी सेंटर तेजी से खुल रहे हैं। जिम जाने वाले, मैराथन रनर्स और हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट करने वाले लोग इसे मसल रिकवरी और रिलैक्सेशन का तरीका मानते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट ने भी इसकी लोकप्रियता बढ़ाई है। कई मामलों में हेल्थ एक्सपर्ट भी इसकी सलाह देते हैं।
इंटेंस वर्कआउट के बाद ठंडा पानी सूजन और मांसपेशियों की तकलीफ को कम करने में मदद कर सकता है। इसलिए कई एथलीट व जिम जाने वाले लोग इसे रिकवरी रूटीन का हिस्सा बनाते हैं।
ठंडे पानी के संपर्क में आने से शरीर में एंड्रेनालिन और एंडोर्फिन जैसे हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जिससे कुछ लोगों को ताजगी और बेहतर महसूस होता है। यह तनाव को कम कर मूड को अच्छा बनाता है।
विशेषज्ञों मानते हैं, आइस पलंज हर किसी के लिए सही नहीं है। आइस बाथ कोई जादुई इलाज नहीं है और इसके फायदे हर व्यक्ति में समान रूप से नहीं होते हैं। यदि किसी को हृदय रोग, अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा, रेनॉड्स सिंड्रोम या गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं, तो बिना डॉक्टर की सलाह के आइस प्लंज नहीं करना चाहिए।