पाकिस्तान मध्यस्थ बनने के लायक नहीं, ईरानी सांसद ने शहबाज-मुनीर को धोया, बोले- वो हमारे पड़ोसी लेकिन...

US-Iran War: ईरानी सांसद इब्राहिम रेजाई ने पाकिस्तान की मध्यस्थता को खारिज करते हुए उसे अविश्वसनीय बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अमेरिकी हितों के दबाव में काम करता है।
Ebrahim Rezaei on Pakistan Mediation
ईरानी सांसद इब्राहिम रेजाई (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Ebrahim Rezaei on Pakistan Mediation: ईरान के एक वरिष्ठ सांसद और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने पाकिस्तान की भूमिका को लेकर स्पष्ट और कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भले ही ईरान का मित्र और पड़ोसी देश है, लेकिन वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए उपयुक्त नहीं है। उनके मुताबिक, पाकिस्तान में वह निष्पक्षता और विश्वसनीयता नहीं है जो एक मध्यस्थ के लिए आवश्यक होती है।

रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि पाकिस्तान अक्सर अमेरिका के हितों को ध्यान में रखकर अपनी बात करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कभी भी अमेरिकी नीतियों के खिलाफ खुलकर नहीं बोलता। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पहले पाकिस्तान के एक प्रस्ताव को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में उससे पीछे हट गया। इसी तरह, अमेरिका ने लेबनान और जब्त की गई संपत्तियों को लेकर भी कई वादे किए थे, जिन्हें पूरा नहीं किया गया।

ईरान को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं

रेजाई के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि ईरान पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भरोसा नहीं करता, हालांकि वह इसे पूरी तरह खारिज भी नहीं कर रहा। इसके साथ ही ईरान का अमेरिका पर अविश्वास भी साफ नजर आता है। इसी बीच ईरान यूरोपीय देशों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।

अराघची ने फ्रांसीसी विदेश मंत्री से की बात

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात, संघर्ष विराम और चल रहे कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा की। अराघची ने इस दौरान यूरोपीय देशों की रचनात्मक भूमिका को महत्वपूर्ण बताया, जबकि फ्रांस ने भी बातचीत जारी रखने के समर्थन को दोहराया।

दूसरी ओर, अराघची अपनी क्षेत्रीय यात्रा के तहत पाकिस्तान भी पहुंचे, जहां उन्होंने अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों और अन्य मुद्दों पर चर्चा की। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन वार्ताओं का परमाणु मुद्दे से कोई संबंध नहीं है। हालांकि, उन्होंने पाकिस्तान को यह जरूर बताया कि युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की क्या शर्तें हैं।

ईरान ने रखी शर्तें

इन शर्तों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नई कानूनी व्यवस्था लागू करना, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा, भविष्य में किसी भी सैन्य आक्रामकता से बचने की गारंटी और नौसैनिक नाकाबंदी को समाप्त करना शामिल है। इस बीच, अराघची रूस के लिए रवाना हो चुके हैं और क्षेत्रीय कूटनीति जारी है।

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