
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता (सोर्स-सोशल मीडिया)
India US bilateral trade relations: अमेरिका-भारत व्यापार परिषद (USIBC) ने हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को दोनों देशों के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ बताया है। USIBC के अध्यक्ष अतुल केशप के अनुसार, यह समझौता न केवल व्यापारिक बाधाओं को कम करेगा बल्कि आर्थिक साझेदारी को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद शुरू हुई यह बातचीत अब एक ठोस आकार ले चुकी है। इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के व्यापारियों और निवेशकों के लिए विकास के नए द्वार खुलने की उम्मीद है।
अतुल केशप ने एक इंटरव्यू में बताया कि इस समझौते के तहत अमेरिका भारत से आने वाले सामान पर टैरिफ में बड़ी कटौती करेगा। इसके जवाब में भारत भी अपने टैरिफ में कमी करने के लिए सहमत हुआ है जिससे दोनों पक्षों को समान लाभ मिल सके। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए उठाया गया है।
यह समझौता निवेशकों के लिए एक ‘स्टार्टिंग पिस्टल’ की तरह काम करेगा जो भविष्य में निवेश की गति को बढ़ाने में मदद करेगा। अमेरिकी व्यापारिक समुदाय इस समझौते के प्रति बेहद उत्साहित है और इसे एक सकारात्मक मनोवैज्ञानिक संकेत के रूप में देख रहा है। यह न केवल व्यापार बल्कि तकनीकी और रणनीतिक क्षेत्रों में भी दोनों लोकतंत्रों को करीब लाने का एक मजबूत माध्यम बनेगा।
वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 200 अरब डॉलर के आसपास बना हुआ है। अतुल केशप का मानना है कि इस नए समझौते की मदद से वार्षिक व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य अब मुमकिन लग रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि भारत आने वाले समय में अमेरिका से भारी मात्रा में उत्पादों की खरीद के लिए तैयार है।
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इस समझौते का लाभ विशेष रूप से कृषि, रक्षा उपकरण, पूंजीगत मशीनरी और एयरोस्पेस जैसे विविध क्षेत्रों को मिलने की संभावना है। साथ ही क्रिटिकल मिनरल्स और परमाणु ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी सहयोग की नई संभावनाएं खुल रही हैं। रक्षा क्षेत्र में सह-उत्पादन और उन्नत तकनीकों का विकास अब दोनों देशों की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रहने वाला है।
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर वॉशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कर रहे हैं। पिछले एक साल की कड़ी मेहनत और दोनों देशों के वार्ताकारों की सतर्कता ने इस समझौते को हकीकत में बदलने में सफलता पाई है। यह विकास भारत की विकास क्षमता और उसकी प्रतिभा पर अमेरिकी कंपनियों के बढ़ते भरोसे को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है।






