
गुयाना के कृषि राज्य मंत्री विकाश रामकिसून (सोर्स-सोशल मीडिया)
Vikash Ramkissoon Hindi Parliament Speech: गुयाना की संसद में हाल ही में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला जब भारतीय मूल के मंत्री विकाश रामकिसून ने अपनी मातृभाषा का गौरव बढ़ाया। ‘बजट 2026’ की बहस के दौरान जब उनकी भाषाई क्षमता पर सवाल उठाए गए, तो उन्होंने शुद्ध हिंदी में दहाड़कर सबको चौंका दिया। यह घटना न केवल गुयाना बल्कि वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा के बढ़ते प्रभाव और सांस्कृतिक जड़ों की मजबूती का प्रमाण है। गुयाना की संसद में हिंदी भाषण के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अपनी संस्कृति से जुड़ाव ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
विपक्षी सांसद विष्णु पांडे ने सदन में विकाश रामकिसून की हिंदी बोलने की क्षमता पर तंज कसा था, जिसका मंत्री ने डटकर मुकाबला किया। जैसे ही उनकी क्षमता पर उंगली उठाई गई, विकाश अपनी कुर्सी से खड़े हुए और बिना किसी हिचकिचाहट के शुद्ध हिंदी में बोलना शुरू कर दिया। उन्होंने आदरणीय अध्यक्ष महोदय को संबोधित करते हुए विपक्षी सदस्य को किसी भी विषय पर तत्काल चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया।
मंत्री विकाश ने ताल ठोकते हुए कहा कि वे इसी वक्त किसी भी स्तर पर और किसी भी जगह जाकर डिबेट करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि विषय विपक्ष तय करेगा और वे बिना किसी तैयारी या कागज के पूरी तरह हिंदी में अपनी बात रखेंगे। उनकी इस आत्मविश्वास भरी दहाड़ को सुनकर संसद में मौजूद सभी नेता हक्का-बक्का रह गए और पूरे सदन में सन्नाटा छा गया।
विकाश रामकिसून की इस प्रभावशाली स्पीच का वीडियो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है और लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं। जॉर्जटाउन में स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी इस पल को हिंदी के वैश्विक गौरव के रूप में सराहा और इसे गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बताया। उच्चायोग ने गर्व से लिखा कि गुयाना की संसद में हमारी हिंदी गूंजी है, जो भारत और गुयाना के सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाती है।
Guyana minister silences Opposition after being questioned over Hindi speaking ability Minister Vikash Ramkisoon responds in Hindi. “Mai Unhe Chunauti Deta Hoon, Vishay Woh Tay Karenge, Aur mai abhi debate karoonga bina Kagaz Ke” https://t.co/iqehR1hWBW pic.twitter.com/1dzDIZUybo — Sidhant Sibal (@sidhant) February 10, 2026
विकाश रामकिसून की पृष्ठभूमि काफी प्रभावशाली है और उनकी उच्च शिक्षा का एक बड़ा हिस्सा भारत की राजधानी दिल्ली से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ कॉमर्स और फाइनेंस की पढ़ाई पूरी की है, जिससे उनका भारत के प्रति लगाव और भी गहरा हुआ है। राजनीति के क्षेत्र में कदम रखने से पहले वे बैंकिंग क्षेत्र में एक सफल मैनेजर के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
वर्तमान में वे गुयाना के कृषि मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं और उनके पास कानून की डिग्री भी मौजूद है। गुयाना की लगभग 40% आबादी भारतीय मूल की है, जिनके पूर्वज 1838 से 1917 के बीच उत्तर प्रदेश और बिहार से वहां जाकर बस गए थे। आज विकाश जैसे नेता उसी गौरवशाली परंपरा और अपनी जड़ों के प्रति अटूट सम्मान का एक नया और सशक्त चेहरा बनकर उभरे हैं।
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संसद में उनके द्वारा दी गई यह चुनौती केवल एक भाषाई जवाब नहीं था, बल्कि अपनी पहचान और विरासत के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक था। विपक्षी दलों को उनकी यह प्रतिक्रिया लंबे समय तक याद रहेगी क्योंकि उन्होंने बिना नोट्स के गंभीर विषयों पर बहस का खुला प्रस्ताव रखा है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय संस्कृति की ताकत सीमाओं को लांघकर दुनिया भर में फैल रही है।
विकाश रामकिसून के इस कदम ने भारतीय प्रवासियों के मन में अपनी भाषा के प्रति सम्मान और भी ज्यादा बढ़ा दिया है जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। उनकी हिंदी सुनकर संसद के सदस्य हैरान रह गए क्योंकि किसी को उम्मीद नहीं थी कि वे इतने सहज होकर शुद्ध हिंदी बोलेंगे। अब पूरी दुनिया गुयाना के इस भारतीय मूल के मंत्री की विद्वत्ता और उनके साहसी अंदाज की कायल हो चुकी है।






