

Trump Immigration Policy Legal Challenge: भारतीय मूल की संघीय जज इंदिरा तलवानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीति पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन के उस विवादास्पद फैसले पर रोक लगा दी है जिससे हजारों प्रवासियों का भविष्य खतरे में पड़ गया था। बोस्टन की एक संघीय अदालत ने सरकार की कार्रवाई को 'मनमाना' बताते हुए प्रवासियों के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। यह कानूनी आदेश ट्रम्प इमिग्रेशन नीति पर कानूनी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है जिसने हजारों परिवारों को संजीवनी दी है।
ट्रंप प्रशासन ने सत्ता संभालते ही बाइडन सरकार द्वारा शुरू किए गए 'फैमिली रीयूनिफिकेशन पैरोल प्रोग्राम' को खत्म करने का आदेश दिया था। इस आदेश की वजह से क्यूबा, हैती, कोलंबिया और ग्वाटेमाला जैसे सात देशों के 8,400 प्रवासियों का कानूनी दर्जा खत्म होने वाला था। जज इंदिरा तलवानी ने शनिवार देर रात दिए अपने ऐतिहासिक फैसले में सरकार के इस कदम को पूरी तरह से अनुचित करार दिया है।
अदालत के इस फैसले से उन हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिली है जिन्होंने अमेरिका में बसने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। ट्रंप सरकार ने इस नीति को लागू करने के लिए 170 अरब डॉलर का भारी-भरकम बजट भी आवंटित किया था लेकिन कोर्ट ने इसे रोक दिया। जज ने स्पष्ट किया कि सत्ता के रसूख और अरबों डॉलर के बजट के बावजूद कानून की स्थापित प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इमिग्रेशन अधिकारों की मसीहा बनकर उभरीं इंदिरा तलवानी का संबंध भारत के पंजाब राज्य के जालंधर जिले के तलवन गांव से जुड़ा हुआ है। उनके पिता माणिक तलवानी एक प्रसिद्ध भूभौतिकीविद थे और उनकी मां जर्मनी की रहने वाली थीं, जिससे वे खुद प्रवासियों की संतान हैं। साल 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें नियुक्त किया था और सीनेट ने 94-0 के भारी बहुमत से उन्हें चुना था।
इंदिरा तलवानी ने अपनी शुरुआती शिक्षा और ग्रेजुएशन की पढ़ाई प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय से बहुत अच्छे अंकों के साथ पूरी की है। इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले से कानून की डिग्री हासिल की जहां वे हमेशा ही शीर्ष छात्रों की सूची में रहीं। जज बनने से पहले उन्होंने बोस्टन और सैन फ्रांसिस्को में नागरिक अधिकारों और श्रम कानून की विशेषज्ञ वकील के रूप में पहचान बनाई थी।
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने तर्क दिया था कि ये पैरोल कार्यक्रम ट्रंप की प्राथमिकताओं के खिलाफ हैं और इनका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि जज तलवानी ने मानवीय आधार पर कड़ा फैसला लेते हुए यह साबित किया कि वह तथ्यों और न्याय के प्रति समर्पित हैं। इस फैसले ने भविष्य में इमिग्रेशन नीतियों को लेकर सरकार और न्यायपालिका के बीच होने वाली कानूनी जंग की एक नई नींव रखी है।