
डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran US News In Hindi: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रविवार, 1 फरवरी 2026 को सामने आए उनके बयानों ने वैश्विक कूटनीति में एक नई चर्चा छेड़ दी है। जो ट्रंप कुछ समय पहले तक ईरान पर विनाशकारी सैन्य हमले की धमकियां दे रहे थे अब उन्होंने बातचीत और समझौते के संकेत दिए हैं।
हाल ही में फॉक्स न्यूज को दिए एक विशेष इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान हमसे बात कर रहा है देखते हैं हम क्या कर सकते हैं, नहीं तो देखेंगे क्या होता है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान इस समय नेगोशिएशन की मेज पर है। हालांकि, दबाव बनाए रखने के लिए अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा (फ्लीट) भी तैनात किया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ ही हफ्ते पहले अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई थी।
इससे पहले, ट्रंप प्रशासन ने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर उसके परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं होता है, तो ‘समय खत्म हो रहा है’ और अगला अमेरिकी हमला पिछले साल जून में किए गए हमलों से कहीं ज्यादा घातक होगा।
ट्रंप ने ईरान के सामने मुख्य रूप से दो मांगें रखी हैं पहला, ईरान अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करे और उसकी अंतरराष्ट्रीय निगरानी सुनिश्चित की जाए दूसरा, देश के भीतर चल रहे विरोध प्रदर्शनों में लोगों की हत्या रोकी जाए। गौरतलब है कि दिसंबर 2025 से ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों में हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आई थीं।
अमेरिका ने ईरान पर रणनीतिक दबाव बनाए रखने के लिए एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन को मध्य पूर्व में तैनात कर रखा है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कूटनीति का समर्थन करते हुए कहा है कि यदि बातचीत ‘फेयर और न्यायसंगत हो तो ईरान समझौते के लिए तैयार है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं। एक ओर तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान और खाड़ी देश लगातार इस संघर्ष को टालने के लिए राजनयिक प्रयास कर रहे हैं। दूसरी ओर, ईरान के भीतर गहराते आर्थिक संकट और जनता के विद्रोह ने तेहरान को लचीला रुख अपनाने पर मजबूर किया होगा। ट्रंप प्रशासन भी शायद एक पूर्ण युद्ध से बचना चाहता है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था और मध्य पूर्व की स्थिरता प्रभावित न हो।






